नयी दिल्ली, नौ फरवरी सरकार ने बृहस्पतिवार को बताया कि 22वें विधि आयोग का तीन साल का कार्यकाल इस महीने के अंत में समाप्त हो रहा है।
राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कानून मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि 22 वें विधि आयोग का गठन 21 फरवरी, 2020 को तीन साल की अवधि के लिए किया गया था और इसके अध्यक्ष ने 9 नवंबर, 2022 को पदभार संभाला था।
उन्होंने कहा, ‘‘22वें विधि आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल आयोग के कार्यकाल के साथ समाप्त होता है।’’
सरकार के सूत्रों ने पहले संकेत दिया था कि 22वें विधि आयोग का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है क्योंकि उसे कार्यालय में बहुत कम समय मिला है।
रीजीजू ने हाल ही में संसद को बताया था कि सरकार ने 21वें विधि आयोग से समान नागरिक संहिता से संबंधित विभिन्न मुद्दों की जांच करने और सिफारिशें करने का अनुरोध किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘21वें विधि आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त, 2018 को समाप्त हो गया। विधि आयोग से प्राप्त सूचना के अनुसार समान नागरिक संहिता से संबंधित मामले को 22वें विधि आयोग द्वारा विचार के लिए लिया जा सकता है।’’
22वें विधि आयोग ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव साथ-साथ कराने के विषय पर अपनी मसौदा रिपोर्ट में पिछली समिति द्वारा उठाए गए छह सवालों पर राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग सहित विभिन्न हितधारकों से हाल ही में नए विचार मांगे थे।
21वें विधि आयोग के एक साथ चुनाव कराने संबंधी मसौदा रिपोर्ट का जिक्र करते हुए 22वें आयोग ने कहा कि उसने 21वें विधि आयोग द्वारा अपनी मसौदा रिपोर्ट में रखे गए छह सवालों पर हितधारकों की राय फिर से लेने का फैसला किया है।
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