देश की खबरें | असम राइफल्स के लिए मणिपुर में शांति बहाली का काम कम चुनौतीपूर्ण नहीं

इंफाल, 26 जुलाई सेना की 3 कोर की कमान के तहत काम कर रहे असम राइफल्स के लिये मणिपुर में संघर्षरत दो जातीय समूहों के बीच शांति बनाए रखने का काम मौजूदा हालात में कम चुनौतीपूर्ण नहीं है। बल के अधिकारियों का कहना है कि देश के सबसे पुराने अर्द्धसैनिक बल को अकसर विरोधी भीड़ और कभी-कभी असहयोगात्मक राज्य मशीनरी का भी सामना करना पड़ता है।

‘पूर्वोत्तर के प्रहरी’ और ‘पहाड़ी लोगों के मित्र’ के रूप में पहचाने जाने वाले अधिकारी और जवान तीन मई को बहुसंख्यक मेइती और पहाड़ी जनजाति कुकी के बीच जातीय संघर्ष के बाद से मनोवैज्ञानिक लड़ाई लड़ रहे हैं। इन जातीय झड़पों में अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

पूरे मणिपुर में मौजूदगी वाले असम राइफल्स के साथ सेना व अन्य अर्द्धसैनिक बलों को प्रदेश में शांति बनाए रखने अथवा दोनों समुदायों के नाराज लोगों को समझाने-बुझाने का काम सौंपा गया है।

नाम न उजागर करने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘लेकिन अंतत: हमें हर तरफ से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।’’

हिंसा भड़कने के बाद से घाटी और पहाड़ी इलाकों में स्थिति की निगरानी करने वाले अधिकारी ने कहा, ‘‘हममें से कोई भी 96 घंटों तक नहीं सोया और हमने विस्थापित लोगों के लिए अपने शिविर खोल दिए हैं, चाहे वह मेइती हों या कुकी। दंगों में फंसा हर व्यक्ति कोई सुरक्षित ठिकाना जानता था तो वह था असम राइफल या सेना का शिविर।’’

अधिकारी ने बताया, ‘‘लेकिन आज दोनों समुदाय हम पर दूसरे की मदद करने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि हमारा एकमात्र काम यह सुनिश्चित करना है कि शांति बनी रहे और मानव जीवन और गरिमा का सम्मान किया जाए।’’

हाल ही में 31 विधायकों ने राज्य में एकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता का हवाला देते हुए असम राइफल्स की 9वीं, 22वीं और 37वीं बटालियन को अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों से बदलने की मांग की थी।

प्रदेश के चुराचांदपुर और बिष्णुपुर जिलों की सीमा पर नौ असम राइफल्स के जवानों को तैनात किया गया है, 22 असम राइफल्स को कांगपोकपी क्षेत्र में और 37 असम राइफल्स को सुगनू क्षेत्रों में तैनात किया गया है।

हालांकि, विधायकों की इस मांग ने इन इकाइयों के अधिकारियों और जवानों को हैरान कर दिया है क्योंकि हिंसा भड़कने के बाद बल के जवानों ने कई लोगों की जान बचायी थी । उसके बाद, ये इकाइयां ‘बफ़र ज़ोन’, जहां दोनों जातीय समूहों के गांव आसपास हैं, में शांति स्थापना में मदद कर रही हैं।

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण, इन इकाइयों के संचालन के बारे में बताते हुए, अधिकारी ने बताया कि तीन मई से इकाई के जवानों ने दो पक्षों के संघर्ष के कारण अपने-अपने घरों को छोड़कर भागने वाले अनेक लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

अधिकारियों को लगता है कि कुछ लोग प्रत्यक्षदर्शी की विश्वसनीयता को कमतर करने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं, और इस मामले में, असम राइफल्स को इस बात का अंदाजा है कि चीजें कहां सही या गलत हुई हैं।

एक अन्य अधिकारी ने उदाहरण के तौर पर एक छोटे से शहर सुगनू में हुयी एक घटना का जिक्र किया, जहां भारतीय सेना के कर्नल रैंक के एक अधिकारी के साथ मणिपुर पुलिस के कर्मियों ने मारपीट की थी।

उन्होंने कहा कि यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई, जिसमें एक कनिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सेना अधिकारी पर गुस्से में अपनी राइफल तान दी, जो उनके शिविर के सामने बदमाशों द्वारा पूरी सड़क खोदने की शिकायत करने आया था।

सड़कों की खुदाई यह सुनिश्चित करने के लिए की गई थी कि अगर आसपास के क्षेत्र में सशस्त्र झड़प होती है, जहां संघर्षरत समुदायों के दोनों पक्ष रहते हैं, तो असम राइफल्स के वाहनों को मौके पर जाने से रोका जा सके।

अधिकारियों ने कहा कि तीन मई से पहले भी, सेना और असम राइफल्स ने कम समय में सूचना पर किसी भी आकस्मिक स्थिति का जवाब देने के लिए 17 टुकड़ियों को तैयार रखा था । असम राइफल्स और सेना की एक टुकड़ी में 40 से 50 जवान होते हैं।

उन्होंने कहा कि असम राइफल्स की मौजूदगी और स्थिति के समय से आंकलन के फलस्वरूप सेना और असम राइफल्स को पूरे मणिपुर में पहले कुछ घंटों के भीतर लगभग 8,000 लोगों को बचाने में मदद मिली, खास तौर से बहुसंख्यक समुदाय से।

एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि संघर्ष के शुरूआती दिनों में ही विस्थापित लोगों की संख्या बढ़ कर 24,000 हो गई। यह असम राइफल्स और पड़ोसी असम एवं अन्य राज्यों से सेना की तीव्र आमद का परिणाम था कि पहले पांच दिनों के भीतर 128 टुकड़ियां तैनात की गयी जो अब बढ़ कर 140 हो गयी है ।

अधिकारियों ने बताया कि चुराचांदपुर में बहुसंख्यक समुदाय गंभीर खतरों का सामना कर रहा है, 4,600 से अधिक नागरिकों को खुमुजाम्बा, हमार वेंग, सैकोट और मंटोप लिकाई से सुरक्षित बचाया गया था।

सक्रियता के साथ तैनाती ने इम्फाल के गैर-अधिसूचित क्षेत्रों के साथ-साथ तेगनौपाल और चुराचांदपुर जिलों के गांवों में भी तेजी से स्थिति को सामान्य बनाने में मदद की जबकि आस-पास असम राइफल्स का कोई ठिकाना नहीं है ।

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