देश की खबरें | जवाहर बाग कांड के मुख्य आरोपी के बेटे ने पिता की मृत्यु का प्रमाण पत्र मांगा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मथुरा जिले में करीब छह वर्ष पहले जिला मुख्यालय के समीप घटित हुए जवाहर बाग काण्ड के मुख्य आरोपी रहे रामवृक्ष यादव के पुत्र ने नगर निगम से अपने पिता की मृत्यु का प्रमाणपत्र मांगा है। नगर निगम ने भी उसे संबंधित फार्म भरकर विधिवत आवेदन करने को कहा है। आवेदन मिलने के बाद निगम इस संबंध में कोई कार्यवाही करेगा।
मथुरा जिले में करीब छह वर्ष पहले जिला मुख्यालय के समीप घटित हुए जवाहर बाग काण्ड के मुख्य आरोपी रहे रामवृक्ष यादव के पुत्र ने नगर निगम से अपने पिता की मृत्यु का प्रमाणपत्र मांगा है। नगर निगम ने भी उसे संबंधित फार्म भरकर विधिवत आवेदन करने को कहा है। आवेदन मिलने के बाद निगम इस संबंध में कोई कार्यवाही करेगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2016 में दो जून की शाम उद्यान विभाग के सौ एकड़ से अधिक दायरे में फैले जवाहर बाग पर कब्जा जमाए बैठे अतिक्रमणकारियों को वहां से हटाने के उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन के दौरान हुई झड़प में दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों व कब्जाधारियों के सरगना रामवृक्ष यादव सहित कुल 29 लोग मारे गए थे।
उस समय उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व की समाजवादी पार्टी की सरकार थी और भारतीय जनता पार्टी ने जवाहर बाग कांड को 2017 के विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनाकर सत्ता परिवर्तन का नारा दिया था। तब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 403 सीटों में अकेले भाजपा को 312 सीटों पर जीत मिली थी।
रामवृक्ष यादव के पुत्र राजनारायण, निवासी गाजीपुर ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में पिता का मृत्यु प्रमाणपत्र पाने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था, जिस पर अदालत ने नगर निगम को प्रमाणपत्र देने का आदेश दिया। राजनारायण ने बताया कि पुलिस के अनुसार उस हिंसा में मेरे पिता भी मारे गए थे, इसलिए नगर निगम मुझे उनका मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करे।
नगर निगम के जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने वाले विभाग के प्रभारी करीम अख्तर कुरैशी ने उस आवेदन पर जवाब देते हुए राजनारायण को फार्म भरकर देने को कहा है, जिसके बाद निगम के अधिकारियों के आदेशानुसार अगली कार्यवाही की जाएगी।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि रामवृक्ष के बेटे ने उच्च न्यायालय में मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए अनुरोध किया था। इस प्रकार का अदालत की तरफ से एक आदेश नगर निगम में आया और इसके बाद आगे की कार्यवाही शुरू की गई है।
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