ताजा खबरें | लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर की पवित्रता भंग की गई, सो नहीं सका रात भर : रुंधे गले से बोले नायडू
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार को सदन में हुई घटना पर क्षोभ व्यक्त करते हुए बुधवार को रुंधे गले से कहा कि वह रात भर सो नहीं सके क्योंकि लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर की पवित्रता भंग की गई।
नयी दिल्ली, 11 अगस्त राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार को सदन में हुई घटना पर क्षोभ व्यक्त करते हुए बुधवार को रुंधे गले से कहा कि वह रात भर सो नहीं सके क्योंकि लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर की पवित्रता भंग की गई।
उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति ने कल की घटना पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि वह इस वरिष्ठ सदन की गरिमा पर आघात के कारण का पता लगाने के लिए प्रयास करते रहे।
उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर होता है और इसकी पवित्रता पर आंच नहीं आने देना चाहिए। उन्होंने कहा ‘‘कल जो सदन में हुआ, वह पहले कभी नहीं हुआ। मैं बहुत दुखी हूं।’’
उन्होंने कहा कि आधिकारियों की मेज और उसके आसपास का हिस्सा सदन के पवित्र गर्भ गृह की तरह है। इस मेज पर राज्यसभा के महासचिव, पीठासीन अधिकारी, अधिकारी और संवाददाता काम करते हैं।
भरे गले से नायडू ने कहा कि इस स्थान की भी पवित्रता है । उन्होंने कहा कि मंदिर में जब श्रद्धालु जाते हैं तो उन्हें एक निश्चित स्थान तक जाने की अनुमति होती है, उसके आगे नहीं। उन्होंने कहा कि सदन के बीचों बीच (आसन के समक्ष, मेज तक) आना इसकी पवित्रता को भंग करने जैसा है और पिछले कुछ वर्षों से ऐसा अक्सर हो रहा है।
उन्होंने कहा ‘‘जिस तरह कल सदन की पवित्रता भंग की गई, उससे मैं बेहद दुखी और आहत हूं। कुछ सदस्य सदन की आधिकारिक मेज पर चढ़ गए, कुछ मेज पर बैठ गए.... मेरे पास अपनी पीड़ा जाहिर करने और कल की घटना की निंदा करने के लिए शब्द नहीं हैं।’’
व्यथित नायडू ने रुंधे गले से कहा कि वह कल रात सो नहीं सके क्योंकि लोकतंत्र के मंदिर की पवित्रता भंग की गई।
विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के सदस्यों द्वारा आसन के समक्ष आ कर हंगामा किए जाने का संदर्भ देते हुए सभापति ने कहा कि मानसून सत्र के शुरू होने के बाद से व्यवधान डालने के लिए कुछ वर्गों में मानो होड़ सी मची हुई है। उन्होंने कहा कि कल जो अप्रिय घटना हुई, उस समय सदन में कृषि क्षेत्र की समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा हो रही थी जो एक महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने कहा कि कल की कार्यसूची में यह चर्चा सूचीबद्ध थी और इसके लिए व्यापक सहमति भी थी।
नायडू ने हंगामे का संदर्भ देते हुए कहा कि सदस्य हंगामा करके, सरकार को अपनी मांग को लेकर बाध्य नहीं कर सकते। सभापति अपनी बात कह रहे थे, इसी दौरान विपक्षी सदस्यों ने अपने अपने मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया।
हंगामे के बीच ही सभापति ने कहा कि विभिन्न तरह के प्रस्तावों के नोटिस आसन स्वीकार करता है और ‘‘कामकाज की सूची’’ की ऐसी होती है जो सदन के सभी वर्गों को स्वीकार हों तथा जिन मुद्दों पर चर्चा की जानी होती है, उनका महत्व भी प्रभावित न हो। उन्होंने कहा ‘‘मैं यह समझ नहीं पाया कि कल के लिए कार्यसूची में जो विषय नियत थे वे किसी भी सदस्य को तीनों कृषि कानूनों सहित कृषि क्षेत्र जुड़े मुद्दे उठाने से कैसे रोक सकते थे जिन्हें वह सदन में उठाना चाहते थे।’’
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