ताजा खबरें | ‘आतंकी ठप्पे’ से नाराज आजमगढ़ के निवासी बोले- यह कलंक विकास की संभावना में बाधा
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(आसिम कमाल)
संजरपुर/सराय मीर (उप्र), 27 फरवरी कभी साहित्य की दिग्गज हस्तियों शिबली नोमानी, अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ और कैफी आजमी की जन्मस्थली के रूप में मशहूर आजमगढ़ वर्ष 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाका मामले में अदालत के फैसले के बाद से ‘आतंकी केंद्र’ के ठप्पे से जूझ रहा है। आजमगढ़ के निवासी इस पर नाराजगी जताते हुए कहते हैं कि इस कलंक ने युवाओं की विकास की संभावनाओं को बाधित किया है।
आजमगढ़ के संजरपुर और सराय मीर गांवों के निवासी इस बात की आलोचना करते हैं कि कुछ लोग उनके जिले को आतंकवादियों की ‘जन्मस्थली’ करार दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनेताओं ने राजनीतिक लाभ के लिए ‘आतंकवाद का कारखाना’ जैसे शब्द गढ़े।
वर्ष 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाका मामले में जिले के पांच निवासियों को मौत की सजा और एक को उम्रकैद की सजा सुनाये जाने के बाद आजमगढ़ पर लगा 'आतंकवाद' का ठप्पा फिर से चर्चा में आ गया था। सजा पाने वालों में से दो दोषी संजरपुर और एक सराय मीर के बीनापारा इलाके का है, जबकि तीन जिले के अन्य इलाकों के हैं। आजमगढ़ का ‘आतंक से जुड़ाव’ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी चर्चा का विषय बन गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी सरकार पर अपने कार्यकाल के दौरान ‘आतंकवादियों को बचाने’ का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आजमगढ़ से संबंध रखने वाले उन दोषियों में से एक के पिता समाजवादी पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता हैं।
गौरतलब है कि 70 मिनट में 21 धमाके के मामले में एक विशेष अदालत ने इस महीने की शुरुआत में 38 लोगों को मौत की सजा सुनाई, जबकि 11 अन्य को उम्रकैद की सजा दी। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
संजरपुर गांव के एक किसान अब्दुल बाकी ने कहा कि आजमगढ़ को आतंकवाद से जोड़ने से सालों से इसकी बदनामी हो रही है और युवाओं के लिए कहीं और नौकरी पाना मुश्किल हो गया है।
बाकी ने पीटीआई- से कहा कि पहले से ही बहुत सारे पूर्वाग्रह हैं और अब विस्फोट मामले में फैसले के बाद आतंकवाद को लेकर बातें हो रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे गांव के बच्चों के लिए दिल्ली जैसी जगहों पर नौकरी पाना लगभग असंभव होने जा रहा है। नेता आतंकवाद के ऐसे ठप्पे का उपयोग राजनीतिक बढ़त के लिए करते हैं, लेकिन आखिर में यह दर्जनों बेगुनाहों को बदनाम करता है और उनकी संभावनाओं को क्षति पहुंचाता है।’’
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