देश की खबरें | बारिश से प्रदर्शनकारी किसानों के तंबुओं में पानी भरा, कड़ाके की ठंड में कंबल भी हुए गीले

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर पिछले एक महीने से भी अधिक समय से डेरा डाले प्रदर्शनकारी किसानों की मुश्किलें रातभर हुई बारिश ने रविवार सुबह और बढ़ा दी। बारिश से उनके तंबुओं में पानी भर गया। उनके कंबल भीग गये तथा ईंधन एवं अलाव के लिए रखी गई लकड़ियां भी गीली हो गई।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, तीन जनवरी केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर पिछले एक महीने से भी अधिक समय से डेरा डाले प्रदर्शनकारी किसानों की मुश्किलें रातभर हुई बारिश ने रविवार सुबह और बढ़ा दी। बारिश से उनके तंबुओं में पानी भर गया। उनके कंबल भीग गये तथा ईंधन एवं अलाव के लिए रखी गई लकड़ियां भी गीली हो गई।

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक लगातार हुई बारिश के चलते आंदोलन स्थलों पर जलभराव हो गया और ‘वाटरप्रूफ’ तंबुओं से भी उन्हें ज्यादा मदद नहीं मिली।

संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य एवं किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने रविवार को कहा कि किसान जिन तंबुओं में रह रहे हैं, वे वाटरप्रूफ हैं लेकिन ये हाड़ कंपा देने वाली ठंड और जलभराव से उनकी रक्षा नहीं कर सकते।

उन्होंने कहा, ‘‘बारिश की वजह से प्रदर्शन स्थलों पर हालात बहुत खराब हैं, यहां जलभराव हो गया है। बारिश के बाद ठिठुरन बहुत बढ़ गई है, लेकिन सरकार को किसानों की पीड़ा नजर नहीं आ रही।’’

सिंघू बॉर्डर पर डेरा डाले किसान गुरविंदर सिंह ने कहा कि कुछ स्थानों पर पानी भर गया है क्योंकि वहां जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं हैं।

हालांकि उन्होंने जोर देते हुए कहा, ‘‘मौसम किसानों के हौसले को पस्त नहीं कर सकता, जो एक महीने से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘कई समस्याओं के बावजूद भी हम यहां से तब तक नहीं हिलने वाले हैं, जब तक कि हमारी मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं।’’

मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली के कई इलाकों में भारी बारिश हुई तथा बादल छाए रहने और पूरबा हवा बहने के चलते न्यूनतम तापमान में वृद्धि हुई है।

विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘सफदरजंग वेधशाला में न्यूनतम तापमान 9.9 डिग्री सेल्सियस तथा 25 मिमी बारिश दर्ज की गई। पालम वेधशाला में न्यूनतम तापमान 11.4 डिग्री तथा 18 मिमी बारिश दर्ज की गई। छह जनवरी तक बारिश के साथ ओले गिरने का अनुमान है।’’

पंजाब और हरियाणा के किसानों समेत हजारों की संख्या में किसान केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के सिंघू, टिकरी और गाजीपुर बार्डर पर एक महीने से भी अधिक समय से डटे हुए हैं।

भारतीय किसान यूनियन (उग्राहण) के नेता सुखदेव सिंह के नेतृत्व में किसान टिकरी बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों ने ठंड से बचने के लिए जो इंतजाम किए हैं, वे बारिश और उसके बाद होने वाले जलभराव के कारण ज्यादा मददगार साबित नहीं हो रहे।

एक अन्य प्रदर्शनकारी किसान वीरपाल सिंह ने कहा कि उनके कंबल, कपड़े, लकड़ियां आदि भीग गए हैं।

उन्होंने बताया, ‘‘बारिश के कारण हुए जलजमाव के चलते हमारे कपड़े भीग गए। खाना बनाने में भी परेशानी आ रही है क्योंकि ईंधन की लकड़ी भीग गई है। हमारे पास एलपीजी (रसोई गैस) सिलेंडर है लेकिन यहां हर किसी के पास यह नहीं है।’’

गाजीपुर बार्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों में शामिल धर्मवीर यादव ने कहा, ‘‘चाहे भारी बारिश हो या तूफान ही क्यों न आ जाए, हम किसी भी परेशानी का सामना करने को तैयार हैं लेकिन जब तक मांगें पूरी नहीं होती, हम इस स्थान से नहीं हटेंगे।’’

बुराड़ी स्थित मैदान में भी शिविरों में पानी भर गया और प्रदर्शनकारी वहां से पानी निकालने और अपने सामान को भीगने से बचाने के लिए जद्दोजहद करते नजर आए।

किसान मजदूर संघर्ष समिति पंजाब के संयुक्त सचिव सुखविंदर सिंह ने कहा, ‘‘इस वक्त हम गेहूं की बुवाई किया करते हैं। पंजाब में हम रात में और सुबह के वक्त खेतों में काम करते हैं, जहां तापमान यहां की तुलना में भी कम है। यह (बारिश) किसानों के साहस को नहीं कर पाएगी।’’

वहीं, कुछ किसानों ने बारिश की संभावना को ध्यान में रखते हुए समुचित तैयारियां भी कर रखी थी।

पंजाब के पटियाला जिले के गुरमेल सिंह ने कहा, ‘‘ बारिश से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। हमने अपनी ट्रैक्टर ट्रालियों को पूरी तरह से ढंक दिया है। ’’

हरियाणा के अंबाला जिला निवासी अवतार सिंह ने कहा, ‘‘हमने बारिश को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियां की थीं। अनाज पूरी तरह से सुरक्षित है और तंबू के अंदर है। लेकिन बारिश से कीचड़ हो गया है जिस कारण लोगों को इधर-उधर जाने में दिक्कत हो रही है। हम इलाके को साफ कर रहे हैं और जल निकासी के लिए कोशिश कर रहे हैं। ’’

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