देश की खबरें | मौजूदा समय साक्ष्य आधारित ‘‘पुलिसिंग’’ का : डीजीपी मिश्रा
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जयपुर, 12 जून राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) उमेश मिश्रा ने सोमवार को कहा कि वर्तमान दौर साक्ष्य आधारित ‘‘पुलिसिंग’’ का है और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों और घरेलू हिंसा पर काबू के लिए विशेष प्रयासों की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान पुलिस अकादमी (आरपीए) में ‘‘जेंडर यूनिट’’ की स्थापना से साक्ष्य आधारित ‘‘पुलिसिंग’’ का मार्ग प्रशस्त होगा।
अकादमी और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) ने सोमवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसका मकसद ‘‘जेंडर यूनिट’’ की स्थापना में सहयोग करना है।
एमओयू पर यूएनएफपीए की भारत में रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव एन्ड्रिया एन वोजनर व आरपीए के निदेशक पी रामजी ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर डीजीपी मिश्रा एवं एन्ड्रीया ने एक बटन दबाकर ‘‘जेंडर यूनिट’’ की शुरुआत की।
यह पहल महिलाओं के प्रति संवेदनशील और उत्तरदायी ‘‘पुलिसिंग’’ की खातिर की गई है। मिश्रा ने एमओयू पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस यूनिट द्वारा पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को लैंगिक समानता पर उचित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर काबू के लिए प्रत्येक जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में इकाइयां गठित की गई है। उन्होंने निर्भया दस्ता एवं महिला सखी सहित पुलिस के विभिन्न प्रयासों की चर्चा की।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा निर्बाध पंजीकरण व थानों में स्वागत कक्षों के निर्माण से महिलाओं सहित कमजोर वर्गों में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि ततपरता से कार्य होने से अनुसंधान समय में भी कमी आई है।
पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) जे श्रीनिवास राव ने कार्यस्थल सहित सभी स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि लैंगिक समानता के संबंध में व्यापक जन चेतना जागृत करने की आवश्यकता है।
एक बयान के अनुसार वोजनर ने कहा कि इस एमओयू से महिलाओं के लिए सुरक्षित और समावेशी राजस्थान के निर्माण की नींव रखी गई है। उन्होंने कहा कि इस एमओयू में महिलाओं के प्रति हर प्रकार की हिंसा कम करने के अलावा वैश्विक सतत विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और महिलाओं एवं लड़कियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण तैयार करने पर जोर दिया गया है।
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