देश की खबरें | महाराष्ट्र की जनता ने शिवसेना (उबाठा) और मनसे को खारिज किया: संजय निरुपम

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मुंबई, 20 अप्रैल शिवसेना नेता संजय निरुपम ने रविवार को कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को निर्णायक रूप से खारिज कर दिया है, क्योंकि उसे एहसास हो गया है कि ये पार्टियां केवल सत्ता के स्वार्थी एजेंडे में रुचि रखती हैं।

निरुपम ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) पर बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से भटकने का आरोप लगाया।

उन्होंने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘महाराष्ट्र की जनता ने शिवसेना (उबाठा) और मनसे, दोनों को निर्णायक रूप से खारिज कर दिया है। ये पार्टियां महाराष्ट्र के लिए खड़े होने का दिखावा करती हैं, लेकिन वास्तव में ये केवल सत्ता के स्वार्थी एजेंडे में रुचि रखती हैं। राजनीतिक रूप से ये अप्रासंगिक हैं।’’

निरुपम ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर कांग्रेस के साथ गठबंधन करके व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, पारिवारिक हितों और सत्ता की भूख को पूरा करने के लिए हिंदुत्व की विचारधारा का त्याग करने का आरोप लगाया।

उन्होंने शिवसेना (उबाठा) और मनसे के बीच संभावित सुलह से किसी भी तरह का लाभ होने से इनकार करते हुए दोनों दलों की राजनीतिक प्रासंगिकता पर सवाल उठाया।

निरुपम ने कहा कि इस विश्वासघात के कारण उन्हें लोगों का समर्थन खोना पड़ा है और अब वह हताश होकर मनसे का रुख कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले विधानसभा चुनाव में मनसे एक भी सीट नहीं जीत सकी। राजनीतिक रूप से शिवसेना (उबाठा) और मनसे, दोनों दिवालिया हो चुके हैं। और जब आप शून्य में शून्य जोड़ते हैं, तब भी परिणाम शून्य ही आता है। यहां तक ​​कि व्यापार में भी घाटे में चल रही दो इकाइयां मिलकर मुनाफे में नहीं आ सकतीं।’’

निरुपम ने महाराष्ट्र के हितों की रक्षा करने में इन दलों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया और कहा कि इनका विभाजनकारी तथा अवसरवादी राजनीति करने का इतिहास रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘मनसे ने लाउडस्पीकर को लेकर सांप्रदायिक तनाव भड़काया, जबकि शिवसेना (उबाठा) ने वक्फ संशोधन अधिनियम का विरोध किया। वे वोटबैंक की राजनीति कर रहे हैं।’’

निरुपम ने कहा कि जब शिवसेना (अविभाजित) कांग्रेस के साथ गठबंधन के कारण ‘‘जंजीरों में जकड़ी’’ थी, तब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र के भविष्य की रक्षा और बालासाहेब ठाकरे की वास्तविक विचारधारा को बनाए रखने के लिए (2022 में) बगावत का नेतृत्व किया था।

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