विदेश की खबरें | ईरान के लोगों ने 1979 की इस्लामी क्रांति की वर्षगांठ मनाई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. अमेरिका समर्थित शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासन की समाप्ति और ईरान में शिया शासन व्यवस्था की स्थापना का वर्षगांठ इस वर्ष ऐसे समय में मनाया जा रहा है, जब पूरे देश में गहरी अनिश्चितता का माहौल है।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

अमेरिका समर्थित शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासन की समाप्ति और ईरान में शिया शासन व्यवस्था की स्थापना का वर्षगांठ इस वर्ष ऐसे समय में मनाया जा रहा है, जब पूरे देश में गहरी अनिश्चितता का माहौल है।

कठोर प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है तथा आगामी दिनों में ट्रंप प्रशासन की ओर से और अधिक प्रतिबंध लगाए जाने की आशंका है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति यह भी संकेत दे रहे हैं कि वह तेहरान के तेजी से बढ़ते परमाणु कार्यक्रम को लेकर उसके साथ समझौता करना चाहते हैं।

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित वार्ता की आलोचना करते हुए शुक्रवार को कहा कि यह कोई समझदारी वाला कदम नहीं है। खामेनेई ने यह भी कहा कि ‘‘ऐसी सरकार के साथ कोई बातचीत नहीं होनी चाहिए।’’ हालांकि, उन्होंने अमेरिका के साथ बातचीत न करने का आदेश जारी करने से परहेज किया।

तेहरान में, शून्य से नीचे के तापमान के बावजूद हाथों में झंडे, गुब्बारे और बैनर लेकर लोगों ने आजादी चौक की ओर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने ‘‘अमेरिका का नाश हो’’ और ‘‘इजराइल का नाश हो’’ जैसे नारे लगाते हुए अमेरिका विरोधी और इजराइल विरोधी बैनरों के साथ-साथ खामेनेई की तस्वीरें भी ले रखी थीं, जिनका राष्ट्र संबंधी मामलों पर अंतिम निर्णय होता है।

एक प्रदर्शनकारी ने एक पोस्टर थाम रखा था, जिस पर लिखा था, ‘‘हम इजराइल को मिटा देंगे।’’ ईरान की सेना ने आजादी चौक पर अपनी कुछ मिसाइलों की प्रतिकृतियां प्रदर्शित कीं। लोगों ने ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मुखौटे पहने लोगों को सलाखों के पीछे ले जा रहे एक वाहन के सामने सेल्फी भी ली।

रैली में शामिल 48 वर्षीय शिक्षक मोहसेन अमिनी ने कहा, ‘‘मुझे पता है कि देश में बहुत सारी आर्थिक समस्याएं हैं, लेकिन मैं यह कहने आया हूं कि हम अमेरिका और इजराइल की धमकियों की परवाह किए बिना अपने देश का समर्थन करेंगे।’’

ईरानी सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित संदेश में अधिक से अधिक लोगों से इसमें शामिल होने का आग्रह किया। इस दिन आधिकारिक तौर पर छुट्टी रहती है और पूरे देश में उत्सव जैसा माहौल रहता है।

इस्लामी क्रांति की शुरुआत ईरान में शाह के शासन को लेकर व्यापक अशांति के साथ हुई, जो कैंसर से गंभीर रूप से बीमार थे और जनवरी 1979 में ईरान से भाग गए थे। इसके बाद अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी निर्वासन से वापस लौटे। कई दिनों तक प्रदर्शन आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के बाद 11 फरवरी 1979 को सरकार गिर गई।

महीनों बाद, जब अमेरिका ने न्यूयॉर्क में कैंसर के इलाज के लिए शाह को देश में आने की अनुमति दी, तो तेहरान में गुस्सा भड़क उठा और नवंबर 1979 में आक्रोशित छात्रों ने अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर लिया। इसके बाद तेहरान में दूतावास में 444 दिनों तक बंधक बनाए रखने के संकट से ईरान और अमेरिका के बीच दुश्मनी की शुरुआत हुई।

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