नयी दिल्ली, 11 जुलाई केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि भारतीयता के मूल्यों से पोषित राष्ट्रीय शिक्षा नीति और उसके अंतर्गत राष्ट्रीय क्रेडिट ढांचा (एनसीआरएफ), राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एनआरएफ) जैसी पहल पूरी दुनिया, विशेष रूप से ‘वैश्विक दक्षिण’ के लिए मानदंड बनेंगे।
वैश्विक दक्षिण में एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देश शामिल हैं।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘विजिटर सम्मेलन 2023’ को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा कि अमृतकाल में शिक्षा के जरिये भारत की लंबी छलांग सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों का क्षमता उन्नयन, आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से नई पीढ़ी को सशक्त बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा, ‘‘ हम वैश्विक कल्याण के लिए आज की आवश्यकता के अनुरूप विश्व स्तरीय शोध को बढ़ावा देने के लिए संकल्पित है।’’
शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीयता के मूल्यों से पोषित नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और उसके अंतर्गत राष्ट्रीय क्रेडिट ढांचा (एनसीआरएफ), राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एनआरएफ) जैसे पहल पूरी दुनिया, विशेषकर वैश्विक दक्षिण के लिए मानदंड बनेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘दो दिनों के विजिटर सम्मेलन में हमने पांच मुद्दों पर गहन चर्चा की, जिसमें हमने यह विचार किया कि अमृतकाल में विकसित भारत के क्या आयाम होंगे? शिक्षा की क्या भूमिका होगी एवं क्या-क्या कदम उठाने होंगे? संस्थानों को किस प्रकार का विस्तार देना होगा तथा क्षमता निर्माण कैसे होगा?
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय क्रेडिट ढांचा (एनसीआरएफ) अनिवार्य है, और इसे लागू करना होगा।
प्रधान ने कहा कि प्रौद्योगिकी के उपयोग के बिना विकास नहीं हो सकता है, ऐसे में शिक्षण संस्थानों से अनुरोध है कि वे नई पीढ़ी को पूरी तरह से प्रौद्योगिकी से जोड़ें।
अनुसंधान के महत्व को रेखांकित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है और मानसून सत्र में इससे संबंधित विधेयक पारित कर इसे कानून का रूप दिया जाएगा।
दीपक
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