देश की खबरें | मंत्रालय ने संसदीय समिति को नमामि गंगे की सफलताओं और अपशिष्ट प्रबंधन की खामियों की जानकारी दी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. नमामि गंगे योजना के कारण उत्तर प्रदेश के दो इलाकों को छोड़कर गंगा जल तीन मानदंडों पर स्नान के लायक पानी के मानकों को पूरा करता है, तथा 2017 से नदी के मुख्य हिस्से में मछलियों के मरने की कोई घटना सामने नहीं आई है।
नयी दिल्ली, चार मई नमामि गंगे योजना के कारण उत्तर प्रदेश के दो इलाकों को छोड़कर गंगा जल तीन मानदंडों पर स्नान के लायक पानी के मानकों को पूरा करता है, तथा 2017 से नदी के मुख्य हिस्से में मछलियों के मरने की कोई घटना सामने नहीं आई है।
एक आधिकारिक रिपोर्ट में दावा किया गया है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने संसदीय समिति को जल प्रदूषण पर दिए गए एक नोट में विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) में भी बड़े बदलाव को उजागर किया है। ईपीआर विभिन्न प्रकार के अपशिष्टों के निपटान के लिए बनाई गई एक व्यापक नीति है।
मंत्रालय ने गंगा के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए नमामि गंगे कार्यक्रम पर नोट में कहा कि फर्रुखाबाद और कानपुर में पुराना राजापुर तथा मिर्जापुर से ताड़ीघाट के बीच के हिस्से को छोड़कर बाकी हिस्सों में इसका पानी स्नान के लिए पीएच, घुलित ऑक्सीजन और जैविक ऑक्सीजन मांग के मानदंडों पर खरा उतरता है।
इसमें कहा गया है कि 2017 के बाद से नदी के मुख्य भाग में अति दूषित जल रिसाव और मछलियों के मरने की कोई घटना सामने नहीं आई है।
मंत्रालय ने दावा किया कि कार्यक्रम की वजह से लगभग 719 एमएलडी (प्रतिदिन मेगालीटर) भूजल, प्रति वर्ष 1,277 मेगावाट ऊर्जा की बचत हुई है तथा कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है।
हरित ईंधन से चलने वाले वाहनों को अपनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बीच, नोट में कहा गया कि बैटरी अपशिष्ट के लिए राष्ट्रव्यापी ईपीआर दायित्व 3.35 लाख मीट्रिक टन से अधिक है, लेकिन लक्ष्य केवल 53,755 मीट्रिक टन ही प्राप्त किया जा सका है।
मंत्रालय ने यह जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन संबंधी स्थायी समिति को दी है।
मंत्रालय ने बताया कि इसी प्रकार, प्लास्टिक कचरे के लिए ईपीआर 34 लाख मीट्रिक टन से अधिक था, लेकिन लक्ष्य लगभग 19 लाख मीट्रिक टन ही हासिल किया जा सका।
रिपोर्ट में कहा गया कि ई-कचरे के मामले में स्थिति बेहतर है, क्योंकि राष्ट्रव्यापी स्तर पर ईपीआर दायित्व 2.75 लाख मीट्रिक टन से अधिक है जबकि 2.54 लाख मीट्रिक टन से अधिक का लक्ष्य प्राप्त किया गया।
टायर अपशिष्ट श्रेणी में ईपीआर 20.35 मीट्रिक लाख टन है जबकि करीब 17.32 मीट्रिक लाख टन लक्ष्य प्राप्त किया गया।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 04, 2025 05:36 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

