देश की खबरें | मंदिरों का रखरखाव राज्य तंत्र द्वारा नियंत्रित नहीं होना चाहिए : अयोध्या के महंत
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नयी दिल्ली, 12 अप्रैल अयोध्या के एक महंत ने शनिवार को यहां कहा कि मंदिरों का रखरखाव और प्रबंधन "राज्य तंत्र" द्वारा नहीं बल्कि "शास्त्रीय आदेशों और पारंपरिक प्रथाओं के अनुरूप" होना चाहिए।
उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में आयोजित तीन दिवसीय अयोध्या पर्व के दूसरे दिन 'भारतीय समाज में मंदिर प्रबंधन' विषय पर आयोजित सत्र के दौरान यह टिप्पणी की।
अयोध्या के बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश दास ने कहा कि "मंदिरों का रखरखाव और प्रबंधन शास्त्रीय आदेशों और पारंपरिक प्रथाओं के अनुरूप होना चाहिए, न कि राज्य तंत्र द्वारा किया जाना चाहिए।"
उन्होंने यह भी कहा कि यद्यपि "धर्म राजनीति की दिशा निर्धारित कर सकता है", लेकिन धर्म को परिभाषित करना या निर्देशित करना राजनीति का काम नहीं है।
इतिहासकार भरत गुप्ता ने सुझाव दिया कि मंदिरों का प्रबंधन "उन परंपराओं के अनुयायियों द्वारा सर्वोत्तम ढंग से किया जा सकता है जिनका वे प्रतिनिधित्व करते हैं, न कि बाहरी प्रशासनिक निकायों द्वारा"।
शाम के सत्र में, ‘‘भारतीय संस्कृति के नवनिर्माण में गोस्वामी तुलसीदास का योगदान’’ विषय पर चर्चा की गयी।
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