देश की खबरें | कोकाटे की ‘रमी’ संबंधी वीडियो की विधानमंडल सचिवालय कर रहा है जांच

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. महाराष्ट्र विधानमंडल सचिवालय उस वीडियो की आंतरिक जांच कर रहा है, जिसमें कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे विधानपरिषद में अपने मोबाइल फोन पर कथित तौर पर ‘रमी’ खेलते हुए नजर आ रहे हैं। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

मुंबई, 24 जुलाई महाराष्ट्र विधानमंडल सचिवालय उस वीडियो की आंतरिक जांच कर रहा है, जिसमें कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे विधानपरिषद में अपने मोबाइल फोन पर कथित तौर पर ‘रमी’ खेलते हुए नजर आ रहे हैं। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि यह वीडियो क्लिप राकांपा (शरदचंद्र पवार) विधायक रोहित पवार और जितेंद्र आव्हाड ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की। यह क्लिप 10 जुलाई को अपराह्न लगभग एक बजकर 40 मिनट पर रिकॉर्ड की गई थी, जब विधानपरिषद की कार्यवाही चल रही थी।

सूत्रों ने बताया कि वीडियो में लोक निर्माण मंत्री मंत्री शिवेंद्रसिंह भोसले और सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन के विधानपरिषद सदस्य (एमएलसी) सदाभाऊ खोत कोकाटे के आसपास बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं।

सूत्रों ने बताया कि उन दोनों मे से कोई भी तथा कोकाटे के पास बैठ सत्तापक्ष के अन्य सदस्य अपने मोबाइल फोन से कुछ ‘करते’ हुए नहीं दिख रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘लगता है कि वीडियो ऊपर गैलरी से शूट किया गया है। दस दिन बाद इस तरह की क्लिप सार्वजनिक होने का क्या मकसद है?"

विधानमंडल का तीन सप्ताह का मानसून सत्र 18 जुलाई को समाप्त हुआ था।

जिस वीडियो में कोकाटे उच्च सदन में ‘रम्मी’ खेलते हुए नजर आ रहे हैं, उसे सबसे पहले राकांपा (एसपी) विधायक रोहित पवार और बाद में उनकी पार्टी के सहयोगी जितेंद्र अव्हाड द्वारा एक्स पर पोस्ट किया गया था, जिससे राजनीतिक बवाल मच गया।

सूत्रों ने बताया कि आंतरिक जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि विधानपरिषद की कार्यवाही के दौरान मंत्री का वीडियो किसने बनाया।

नासिक जिले के सिन्नर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले कोकाटे ने आरोपों से इनकार किया है और विपक्षी विधायकों पर मानहानि का मुकदमा करने की धमकी दी है।

कोकाटे ने मंगलवार को दावा किया था कि उन्होंने अपने मोबाइल फोन पर कभी ऑनलाइन ‘रमी गेम’ नहीं खेला जैसा कि विपक्ष आरोप लगा रहा है।

मंत्री ने यह भी कहा कि वह जांच के लिए विधानमंडल के पीठासीन अधिकारियों को पत्र लिखेंगे। उन्होंने कहा कि अगर वह दोषी पाए गए तो नागपुर में शीतकालीन सत्र के दौरान अपना इस्तीफा सौंप देंगे।

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