विदेश की खबरें | प्रशांत क्षेत्र के द्वीपीय देशों के नेताओं ने जलवायु आपातकाल का ऐलान किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. फिजी में इस हफ्ते संपन्न, 18 सदस्यीय प्रशांत द्वीपीय मंच (पैसिफिक आईलैंड्स फोरम) के सदस्य देशों के नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले ही किरिबाती ने मंच की सदस्यता से बाहर निकलने का ऐलान कर दिया था। किरिबाती के इस कदम को चीन के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।

फिजी में इस हफ्ते संपन्न, 18 सदस्यीय प्रशांत द्वीपीय मंच (पैसिफिक आईलैंड्स फोरम) के सदस्य देशों के नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले ही किरिबाती ने मंच की सदस्यता से बाहर निकलने का ऐलान कर दिया था। किरिबाती के इस कदम को चीन के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।

‘ऑस्ट्रेलियाई एसोसिएटेड प्रेस’ ने दस्तावेज देखने के बाद कहा कि जल्द ही जारी होने वाली विज्ञप्ति में नेताओं ने मंच की जलवायु परिवर्तन प्राथमिकताओं के प्रति नयी ऑस्ट्रेलियाई सरकार की प्रतिबद्धता का स्वागत और पूरा समर्थन किया।

मंच में शामिल राष्ट्रों में सबसे धनी और सबसे अधिक आबादी वाले ऑस्ट्रेलिया में मई में चुनी गई नयी सरकार ने दशक के अंत तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को वर्ष 2005 के स्तर के मुकाबले 43% कम करने की प्रतिबद्धता जताई है। लेकिन पिछली ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने वर्ष 2030 तक केवल 26 से 28 फीसदी की कटौती करने के लिए प्रतिबद्धता जताई थी।

विज्ञप्ति में, मंच में शामिल सभी राष्ट्रों से वैश्विक ताप (ग्लोबल वार्मिंग) को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के अनुरूप प्रतिज्ञाओं और प्रतिबद्धताओं पर अमल करने का आग्रह किया गया है।

ऑस्ट्रेलिया का वर्ष 2030 तक 43% की कमी और 2050 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन का वर्तमान लक्ष्य आकांक्षा से कम है।

मंच में शामिल कई नेता धरती के तापमान में वृद्धि होने से अपने अस्तित्व के लिए खतरा महसूस कर रहे हैं। ये नेता जलवायु परिवर्तन को सबसे बड़ा सुरक्षा जोखिम मानते हैं और उन्होंने जलवायु आपातकाल की घोषणा की है।

शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करने वाले फिजी के प्रधानमंत्री फ्रैंक बाइनीमारामा ने ट्वीट करके ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीस से अनुरोध किया कि वह आगे की कार्रवाई करें।

किरिबाती के मंच से हटने के मद्देनजर नेताओं के लिए प्रशांत क्षेत्र की एकता एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा था। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड सुवा समझौते को वित्तीय सहायता देंगे, जो मंच में सुधार करने समेत किरिबाती को मंच में शामिल करने के लिए नये कूटनीतिक प्रयास करेगा।

क्षेत्र में चीन का बढ़ता प्रभाव भी नेताओं के मध्य चर्चा का विषय था।

गौरतलब है कि चीन और सोलोमन द्वीप के बीच सुरक्षा समझौतों की कड़ी आलोचना करने वालों में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी शुमार हैं। सोलोमन द्वीप अगले साल मंच के नेताओं के सालाना शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\