देश की खबरें | गुजरात उच्च न्यायालय ने रथ यात्रा पर आदेश में कहा: सरकार के रूख से निराश हैं
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

अहमदाबाद, 28 जुलाई गुजरात उच्च न्यायालय ने 23 जून को अहमदाबाद में 143वीं भगवान जगन्नाथ यात्रा के आयोजन की अनुमति देने से दृढ़ता के साथ इनकार करने की बजाय राज्य सरकार के तुष्टिकरण की नीति अपनाने पर निराशा व्यक्त की है।

न्यायालय ने कहा, ‘‘अपनी धार्मिक भावनाएं आहत होने के बावजूद ज्यादातर लोगों ने सही समझा कि वर्षों पुरानी रथ यात्रा रद्द करने के पीछे लोगों के स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं हैं। हालांकि, उसे राज्य सरकार के निष्क्रिय और दबाब में झुक जाने वाले रूख से निराशा हुई है।’’

यह भी पढ़े | कोरोना के पश्चिम बंगाल में 2134 नए मामले पाए गए: 28 जुलाई 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

एक जनहित याचिका पर मंगलवार को उपलब्ध अपने अंतिम आदेश में अदालत ने कहा, ‘‘राज्य में कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व करने वाले एक धर्मनिरपेक्ष निकाय के रूप में, सरकार का मुख्य ध्यान हर कीमत पर लोगों के स्वास्थ्य और उनकी भलाई पर होना चाहिए, भले ही इसका मतलब कुछ धार्मिक नेताओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करना हो।’’

जनहित याचिका में रथ यात्रा को अनुमति नहीं दिये जाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

यह भी पढ़े | असम विधानसभा के उपाध्यक्ष अमीनुल हक लश्कर पाए गए कोरोना संक्रमित.

अदालत ने 20 जून को जनहित याचिका में अपने आदेश में 23 जून को अहमदाबाद में प्रस्तावित रथ यात्रा पर रोक लगा दी थी।

अदालत ने कहा कि भगवान जगन्नाथ यात्रा के आयोजन की अनुमति देने से दृढ़ता के साथ इनकार करने की बजाय सरकार ने तुष्टिकरण की नीति को अपनाया।

मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जे बी पर्दीवाला की पीठ ने आदेश में कहा, ‘‘महामारी के दौरान हमारे पास खुशामद के लिए समय नहीं है। हमें कार्रवाई की आवश्यकता है। मजबूत, व्यावहारिक और ठोस कार्रवाई।’’

पत्रकार हितेश चावड़ा द्वारा अपने वकील ओम कोतवाल के माध्यम से दायर जनहित याचिका में शहर में कोरोनो वायरस महामारी को देखते हुए जुलूस की अनुमति नहीं देने के लिए अदालत से अनुरोध किया गया था।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)