देश की खबरें | तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण से मुंबई हमले में पाकिस्तानी सरकारी तत्वों की भूमिका का पता चलेगा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा के अमेरिका से प्रत्यर्पण से जांच एजेंसियों को इस जघन्य हमले के पीछे पाकिस्तानी सरकारी तत्वों की भूमिका को उजागर करने में मदद मिलेगी। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
नयी दिल्ली, 14 फरवरी मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा के अमेरिका से प्रत्यर्पण से जांच एजेंसियों को इस जघन्य हमले के पीछे पाकिस्तानी सरकारी तत्वों की भूमिका को उजागर करने में मदद मिलेगी। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को हुए हमले में 166 लोग मारे गए थे।
एक बड़े कदम के तहत, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि उनके प्रशासन ने भारत में न्याय का सामना करने के लिए राणा के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है।
पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक राणा वर्तमान में लॉस एंजिल्स के एक महानगरीय हिरासत केंद्र में बंद है। उसे पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली से जुड़ा माना जाता है, जो 26/11 हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा है कि भारत राणा के आत्मसमर्पण और अमेरिका से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पर काम कर रहा है।
सूत्रों ने बताया कि राणा के शीघ्र प्रत्यर्पण से जांच एजेंसियों को 26/11 के आतंकवादी हमले के पीछे पाकिस्तानी सरकारी तत्वों की भूमिका को उजागर करने में मदद मिलेगी और इससे जांच पर नयी रोशनी पड़ सकती है।
दस पाकिस्तानी आतंकवादियों के एक समूह ने 26 नवंबर, 2008 को अरब सागर में समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करके भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई में घुसने के बाद एक रेलवे स्टेशन, दो लक्जरी होटल और एक यहूदी केंद्र पर समन्वित हमला किया था।
मारे गए 166 लोगों में अमेरिकी, ब्रिटिश और इजराइली नागरिक भी शामिल थे। करीब 60 घंटे तक चले इस हमले ने पूरे देश में दहशत फैला दी और भारत और पाकिस्तान को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया।
नवंबर 2012 में, पाकिस्तानी समूह के एकमात्र जीवित बचे हमलावर अजमल आमिर कसाब को पुणे की यरवदा जेल में फांसी पर लटका दिया गया था।
अमेरिका के संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) ने मुंबई और कोपेनहेगन में आतंकवादी हमलों के लिए मदद मुहैया कराने के आरोप में राणा को अक्टूबर 2009 में शिकागो में गिरफ्तार किया था।
सूत्रों ने बताया कि भारत कई वर्षों से राणा के प्रत्यर्पण का प्रयास कर रहा है क्योंकि उसका संबंध पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और हरकत-उल-जिहादी इस्लामी (एचयूजेआई) तथा हेडली से रहा है एवं मुंबई हमलों में भी उसकी सक्रिय संलिप्तता रही है।
आरोप है कि राणा को हेडली के आतंकी संबंधों के बारे में पता था और उसने मुंबई में टोह लेने और नयी दिल्ली में नेशनल डिफेंस कॉलेज (एनडीसी) और मुंबई में चबाड हाउस पर हमलों की साजिश रचने में भी मदद की थी। जनवरी में अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने मामले में राणा की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी।
राणा राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) द्वारा वांछित है, जो 26/11 हमले के मामले की जांच कर रहा है।
जांच के दौरान प्रतिबंधित आतंकी समूहों लश्कर-ए-तैयबा और एचयूजेआई के आतंकवादियों-हाफिज मुहम्मद सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मजीद उर्फ वसी, इलियास कश्मीरी और अब्दुर रहमान हाशिम सईद उर्फ मेजर अब्दुर्रहमान उर्फ पाशा की भूमिका सामने आई है। इसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के अधिकारियों मेजर इकबाल उर्फ मेजर अली, मेजर समीर अली उर्फ मेजर समीर की भी मिलीभगत रही है। ये सभी पाकिस्तान के निवासी हैं।
एनआईए ने हेडली और राणा के प्रत्यर्पण के लिए अमेरिका को अनुरोध पत्र भी भेजा था। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान को जांच में सहायता के लिए अनुरोध पत्र भेजा गया है और जवाब का इंतजार है।
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