देश की खबरें | न्यायालय रद्द हुयी उड़ानों के लिये हस्तांतरणीय रिफंड वाउचर देने के केन्द्र के सुझाव पर विचार करेगा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से रद्द हुयी उड़ानों में टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को हस्तांतरणीय रिफंड वाउचर देने के केन्द्र के सुझाव पर विचार किया जायेगा।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 25 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से रद्द हुयी उड़ानों में टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को हस्तांतरणीय रिफंड वाउचर देने के केन्द्र के सुझाव पर विचार किया जायेगा।

शीर्ष अदालत ने महामारी की वजह से उड़ाने रद्द होने के कारण इनमें टिकट बुक कराने वाले यात्रियों के पैसे की वापसी के मुद्दे पर गैर सरकारी संगठनों और यात्रियों के संघों तथा अन्य की याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई पूरी कर ली। न्यायालय इस पर अपना फैसला बाद में सुनायेगा।

यह भी पढ़े | महाराष्ट्र: बीते 24 घंटे में 281 पुलिसकर्मी हुए कोविड-19 पॉजिटिव, संक्रमितों की संख्या बढ़कर 22,269 हुई, अब तक 239 की मौत: 25 सितंबर 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ से केन्द्र और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यात्रियों को हस्तांतरणीय रिफंड वाउचर दिये जा सकते है जिनका इस्तेमाल वे ट्रैवेल एजेन्ट कर सकते हैं जिन्होंने उन उड़ानों के लिये यात्रियों के टिकट बुक कराये थे जो रद्द हो गयी थी।

पीठ ने कहा, ‘‘अगर ट्रैवेल एजेन्ट यात्रियों के वाउचर का इस्तेमाल कर सकते हैं तो यह ठीक सुझाव है।’’

यह भी पढ़े | Bihar Elections Model Code of Conduct: बिहार में आदर्श आचार संहिता लागू, अब नेताओं पर EC रखेगी पैनी नजर- जानें पूरा नियम.

इससे पहले, मेहता ने कहा कि कोई भी ट्रैवेल एजेन्ट हो सकता है और सरकार का उन पर कोई नियंत्रण नहीं है क्योंकि उसे इसकी जानकारी नहीं हैं कि कौन पंजीकृत है और कौन नहीं।

पीठ ने जानना चाहा कि अगर एक समय सीमा के भीतर रिफंड वाउचर का इस्तेमाल नहीं हुआ तो क्या यह राशि ट्रैवेल एजेन्ट के खाते में चली जायेगी?

मेहता ने कहा कि सरकार इन ट्रैवेल एजेन्ट को न तो जानती है न इन्हें मान्यता देती है क्योंकि इनका पंजीकरण नहीं है और एक एजेन्ट उसके और विमान कंपनी के बीच समझौते के आधार पर ब्लाक में टिकट खरीद सकता है।

गैर सरकारी संगठन ‘प्रवासी लीगल सेल’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े का कहना था कि उनकी चिंता विदेश से टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को लेकर है। वह चाहते थे कि महानिदेशालय को उन लोगों को भी धन वापसी की योजना में शामिल करना चाहिए जिन्होंने खाड़ी के देशों जैसे गंतव्यों से भारत लौटने के लिये टिकट बुक कराये थे।

पीठ ने कहा कि उसने सभी पक्षों की दलीलों को सुना है और केन्द्र के सुझाव का भी संज्ञान लिया है। पीठ ने कहा कि वह विदेशी विमान कंपनियो के मुद्दे पर गौर नहीं करेगा क्योंकि भारत सरकार उन टिकटों के लिये धन वापसी नहीं कर सकती है।

इस मामले में सुनवाई के दौरान पैसेन्जर्स एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी ए सुन्दरम, ट्रैवल एजेन्ट्स फेडरेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पल्लव सिसोदिया और कुछ विमान कंपनियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने भी दलीलें पेश कीं।

न्यायालय ने नौ सितंबर को केन्द्र से जानना चाहा था कि क्या वह कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान विमान यात्रा के लिये बुक कराये गये टिकटों का पूरा पैसा वापस करने के लिये तैयार है।

अनूप

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\