नयी दिल्ली, 30 अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया जिसमें आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विधानसभा सीट बढ़ाने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए केंद्र को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने के पुरुषोत्तम रेड्डी द्वारा दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिन्होंने दलील दी है कि केवल केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया को पूरा करना और आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को इससे बाहर रखना असंवैधानिक है।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वह जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के साथ समानता चाहते हैं और आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की की जानी चाहिए।
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धारा 26 का हवाला दिया और कहा कि परिसीमन प्रक्रिया 2026 की जनगणना समाप्त होने के बाद ही शुरू की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि परिसीमन एक बहुत बड़ी प्रक्रिया है और इसे रातोंरात नहीं किया जा सकता। नटराज ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया केंद्र शासित प्रदेश के मामले में है और इसे राज्य के बराबर नहीं माना जा सकता।
याचिकाकर्ता के वकील ने केंद्र शासित प्रदेश और राज्य के बीच अंतर किए जाने का विरोध किया और दलील दी कि केंद्र द्वारा पूर्व में जारी परिसीमन अधिसूचना में असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नगालैंड को शामिल किया गया था, लेकिन आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को नहीं, हालांकि पूर्वोत्तर राज्य भी संविधान के अनुच्छेद 170 के तहत शासित हैं।
पीठ ने उनसे पूछा कि क्या उनकी दलील यह है कि जब भी केंद्र परिसीमन अधिनियम के तहत शक्ति का प्रयोग करता है, तो यह सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां तक परिसीमन के लिए अधिसूचना का संबंध है, राज्यों में केंद्र शासित प्रदेश भी शामिल होंगे और परिसीमन अधिनियम की धारा 2 (एफ) का हवाला दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्य, जो जम्मू-कश्मीर अधिसूचना से लगभग पांच साल पहले अस्तित्व में आए थे, को इसमें शामिल नहीं किया गया। बाद की अधिसूचना में पूर्वोत्तर राज्यों को भी छोड़ दिया गया। बहिष्कार का कारण अनुच्छेद 170 को नहीं बताया गया। मेरा कहना यह है कि परिसीमन प्रक्रिया से उन्हें बाहर रखना गलत था।’’
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