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उच्चतम न्यायालय ने पारसी लोगों के परंपरागत अंतिम संस्कार से जुड़ी याचिका पर केंद्र से मांगा जवाब

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र और गुजरात सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें पारसी समुदाय के उन सदस्यों के पारंपरिक रूप से अंतिम संस्कार की मांग की गई थी, जिन्होंने कोविड-19 से अपनी जान गंवा दी थी.

उच्चतम न्यायालय ने पारसी लोगों के परंपरागत अंतिम संस्कार से जुड़ी याचिका पर केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट (Photo Credits: Wikimedia Commons)

नयी दिल्ली, 7 दिसंबर : उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र और गुजरात सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें पारसी समुदाय के उन सदस्यों के पारंपरिक रूप से अंतिम संस्कार की मांग की गई थी, जिन्होंने कोविड-19 से अपनी जान गंवा दी थी. सूरत पारसी पंचायत बोर्ड द्वारा दायर अपील में गुजरात उच्च न्यायालय के 23 जुलाई के आदेश को चुनौती दी गई है, जिसने बोर्ड की याचिका को खारिज कर दिया है. पारसी समुदाय में शव के अंतिम संस्कार की ‘दोखमे नशीन’ परंपरा है जिसमें शव को गिद्धों व अन्य पक्षियों के लिए खुले में छोड़ दिया जाता है.

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ को बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता फली नरीमन ने बताया कि यह मुद्दा वायरस के एक नए स्वरूप के कारण प्रासंगिक था. नरीमन ने कहा कि पारसियों में पार्थिव शरीर उठाने वालों का एक समुदाय होता है और अगर किसी का निधन हो जाता है तो परिवार के सदस्य पार्थिव शरीर को नहीं छूते हैं और केवल विशिष्ट समुदाय के लोग ही ऐसा कर सकते हैं. यह भी पढ़ें : कांग्रेस लोगों को धोखा देने के लिए जानी जाती है: मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई

उन्होंने कहा कि कोविड-19 पीड़ितों के अंतिम संस्कार और शवों को दफनाने के लिए सामान्य दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं लेकिन पारसी समुदाय के बारे में कुछ भी नहीं है. पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार करने की आवश्यकता है और इस पर प्रकाश डाला कि इस संबंध में निर्णय है, जो कुछ धर्मों में आवश्यक अधिकारों से संबंधित है. पीठ ने कहा कि वह शीतकालीन अवकाश के बाद अदालत के दोबारा खुलने पर मामले की सुनवाई करेगी.

(The above story first appeared on LatestLY on Dec 06, 2021 10:47 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).