देश की खबरें | न्यायालय ने राज्यों से न्यायपालिका के लिए वितरित किए गए धन का ब्योरा मांगा
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नयी दिल्ली, 26 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को राज्यों से कहा कि वे केंद्र प्रायोजित योजना के तहत उन्हें उपलब्ध कराई गई राशि और राज्य तथा जिला न्यायपालिका के लिए उनके द्वारा वितरित की गई राशि का ब्योरा उपलब्ध कराएं।
शीर्ष अदालत ने राज्य सरकारों के विधि सचिवों से हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा जिसमें राज्य और जिला न्यायपालिका को प्रदान की जाने वाली राशि तथा अन्य परियोजनाओं के मद में दी की गई राशि का ब्योरा शामिल हो।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि विधि सचिवों द्वारा यह कवायद चार सप्ताह के भीतर पूरी कर ली जानी चाहिए।
पीठ ने कहा कि राज्यों की ओर से ब्योरा दिया जाना चाहिए कि उन्होंने पिछले पांच साल में केंद्र प्रायोजित योजना के तहत उन्हें मिली राशि में से न्यायपालिका के लिए असल में कितना धन खर्च किया।
शीर्ष अदालत राष्ट्रीय न्यायालय प्रबंधन प्रणाली समिति की रिपोर्ट से संबंधित एक मामले को देख रही है।
पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम नटराज द्वारा प्रस्तुत एक नोट का जवाब देने के लिए भी कहा, जो बुनियादी ढांचे की स्थिति और न्यायिक अधिकारियों की संख्या के मुद्दे पर केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
इसने कहा, ‘‘राज्य सरकारों के विधि सचिव भी हलफनामे पर अपनी प्रतिक्रिया प्रस्तुत करेंगे जिसमें विशेष रूप से स्पष्ट हो कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत राज्य को कितनी धनराशि उपलब्ध कराई गई है और राज्य सरकारों ने राज्य तथा जिला न्यायपालिका के लिए असल में कितनी राशि वितरित की है।’’
पीठ मामले में अगली सुनवाई सितंबर के पहले सप्ताह में करेगी।
शीर्ष अदालत ने कहा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल द्वारा जमा किए गए नोट की प्रति सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल के साथ-साथ राज्यों के विधि सचिवों को भी भेजी जाए।
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