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देश की खबरें | न्यायालय ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों में खाली पद नहीं भरने के लिए कुछ राज्यों से जताई नाराजगी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में रिक्त पदों को न भरने के लिए दिल्ली और पड़ोसी राज्यों हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों की बृहस्पतिवार को आलोचना की।

देश की खबरें | न्यायालय ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों में खाली पद नहीं भरने के लिए कुछ राज्यों से जताई नाराजगी

नयी दिल्ली, आठ मई उच्चतम न्यायालय ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में रिक्त पदों को न भरने के लिए दिल्ली और पड़ोसी राज्यों हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों की बृहस्पतिवार को आलोचना की।

न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने अगस्त 2024 के अपने आदेश का पालन न करने पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के मुख्य सचिवों को अवमानना ​​नोटिस जारी किया। अदालत ने अपने आदेश में उन्हें इस साल 30 अप्रैल तक रिक्त पदों को भरने के लिए कहा था।

शीर्ष अदालत ने बताया कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति में 55 प्रतिशत पद खाली हैं और यह चौंकाने वाली बात है कि यह निकाय "वस्तुतः निष्क्रिय" है।

शीर्ष अदालत ने नोटिस जारी करते हुए अधिकारियों को यह बताने का आदेश दिया कि गैर-अनुपालन के लिए उन्हें न्यायालय की अवमानना ​​अधिनियम, 1971 के तहत दंडित क्यों न किया जाए।

दिल्ली के मुख्य सचिव को 19 मई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है, जबकि अन्य राज्यों के मुख्य सचिवों को 18 जुलाई को डिजिटल माध्यम से पेश होने के लिए कहा गया है।

पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए 1985 से कठोर आदेश पारित करती रही है, जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वैधानिक प्राधिकरण होने के नाते प्रदूषण रोकने एवं कानूनों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा उन्हें पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, वायु अधिनियम और जल अधिनियम के तहत कई शक्तियां दी गई हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘जहां तक एनसीआर राज्यों की बात है, तो हमने पाया कि स्थिति बहुत खेदजनक है। हमारे 27 अगस्त, 2024 के आदेश में कहा गया था कि एनसीआर राज्यों के संबंध में रिक्तियों को 30 अप्रैल, 2025 तक भरा जाएगा। जहां तक ​​हरियाणा का संबंध है, 35 प्रतिशत पद रिक्त हैं। राजस्थान में 45 प्रतिशत पद रिक्त हैं।’’

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश में 45 प्रतिशत पद रिक्त हैं। दिल्ली में लगभग 55 प्रतिशत पद खाली हैं। इसलिए, जहां तक दिल्ली का सवाल है तो यह कहना सही होगा कि प्रदूषण नियंत्रण निकाय निष्क्रिय है।’’

पीठ ने कहा कि पिछले कई वर्षों से दिल्ली बढ़ते वायु प्रदूषण से जूझ रही है।

अदालत ने कहा, ‘‘इस पृष्ठभूमि में हम यह जानकर स्तब्ध हैं कि दिल्ली की प्रदूषण नियंत्रण समिति वस्तुतः निष्क्रिय हो चुकी है, क्योंकि 55 प्रतिशत पद रिक्त हैं। हरियाणा सरकार ने समस्या व्यक्त की है कि इन पदों के लिए उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भर्ती प्रक्रिया को केवल अपने राज्य के लोगों तक सीमित रखने की आवश्यकता नहीं है। भर्ती प्रक्रिया अखिल भारतीय हो सकती है।"

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा पर 27 अगस्त, 2024 के आदेश का उल्लंघन करने के लिए "जानबूझकर चूक" करने का आरोप लगाते हुए अदालत ने कहा, "हम निर्देश देते हैं कि उपरोक्त राज्यों के मुख्य सचिवों को अवमानना ​​का नोटिस जारी किया जाए।"

मुख्य सचिवों को यह बताने का आदेश दिया गया है कि उन्हें न्यायालय की अवमानना ​​अधिनियम, 1971 के तहत दंडित क्यों न किया जाए।

पीठ ने कहा, "हम यह स्पष्ट करते हैं कि अगली तिथि तक अनुपालन न करने पर यह गंभीर अवमानना ​​का मामला बन जाएगा।"

शीर्ष अदालत ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में 21 प्रतिशत पद रिक्त होने के तथ्य पर भी गौर किया और उन्हें अगस्त, 2025 तक भरने का निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि यहां तक ​​​​कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) में भी रिक्त पद हैं और केंद्र यह सुनिश्चित करे कि अगस्त 2025 तक सभी रिक्तियां भर दी जाएं।

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(The above story first appeared on LatestLY on May 08, 2025 08:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).