देश की खबरें | अदालत ने स्कूल को बच्ची के लिए स्थानांतरण प्रमाण-पत्र जारी करने का निर्देश दिया,
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक निजी स्कूल को अपनी एक छात्रा को स्थानांतरण प्रमाण-पत्र जारी करने का निर्देश दिया है, हालांकि उसके पिता ने अलग रह रही अपनी पत्नी के साथ लंबित वैवाहिक विवाद के कारण इसके खिलाफ याचिका दायर की है।
नयी दिल्ली, छह मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक निजी स्कूल को अपनी एक छात्रा को स्थानांतरण प्रमाण-पत्र जारी करने का निर्देश दिया है, हालांकि उसके पिता ने अलग रह रही अपनी पत्नी के साथ लंबित वैवाहिक विवाद के कारण इसके खिलाफ याचिका दायर की है।
न्यायमूर्ति विकास महाजन ने कहा कि वैवाहिक या अभिरक्षा विवाद में बच्चे का हित सर्वोपरि होता है और बच्चों के नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत स्कूल स्थानांतरण प्रमाण-पत्र देने से इनकार नहीं कर सकता।
अदालत ने कहा, ‘‘प्रावधान का अवलोकन करने पर स्पष्ट रूप से पता चलता है कि इसी प्रावधान के अनुसार स्कूल किसी अन्य स्कूल में प्रवेश के इच्छुक बच्चे को स्थानांतरण प्रमाण-पत्र जारी करने से इनकार नहीं कर सकता।
अदालत ने 30 अप्रैल को पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘स्थानांतरण प्रमाण-पत्र जारी करने में देरी की स्थिति में स्कूल के प्रधानाध्यापक या प्रभारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।’’
अदालत ने कहा, ‘‘यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि वैवाहिक या अभिरक्षा विवाद में बच्चे का हित सर्वोपरि होता है।’’
याचिकाकर्ता बच्चे ने कहा कि अप्रैल 2024 में जब वह अशोक विहार क्षेत्र के एक निजी स्कूल में कक्षा-दो में पढ़ रही थी, तब उसकी मां उसके पिता से अलग हो गई थी।
मां ने बाद में उसे गुरुग्राम के एक स्कूल में दाखिला दिलाया, लेकिन पिता के रुख के कारण पूर्ववर्ती स्कूल ने स्थानांतरण प्रमाण पत्र जारी करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने कहा कि अभिरक्षा याचिका या तलाक याचिका में स्थानांतरण प्रमाण पत्र जारी न करने के संबंध में पारिवारिक न्यायालय द्वारा कोई आदेश या निर्देश पारित नहीं किया गया था।
अदालत ने आदेश दिया, ‘‘याचिका का निपटारा प्रतिवादी (स्कूल) को इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से एक सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को स्थानांतरण प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश देते हुए किया जाता है।"
यदि स्कूल वर्तमान आदेश से असंतुष्ट है, तो वह याचिका को पुनर्जीवित करने के लिए आवेदन दायर करने के लिए स्वतंत्र है।
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