नयी दिल्ली, 29 मई गूगल के वोडाफोन आइडिया में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने पर नजर संबंधी रिपोर्ट के बीच दूरसंचार कंपनी ने शुक्रवार को कहा कि वह निरंतर विभिन्न अवसरों का आकलन करती रहती है लेकिन उसके निदेशक मंडल के समक्ष अभी ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।
वोडाफोन आइडिया ने यह स्पष्टीकरण बंबई शेयर बाजार को दिया है। उसने यह स्पष्टीकरण इस रिपोर्ट के एक दिन बाद दिया है कि अल्फाबेट की इकाई गूगल की दूरसंचार कंपनी में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी पर नजर है।
कंपनी ने शुक्रवार को बयान में कहा, ‘‘कॉरपोरेट रणनीति के तहत कंपनी अपने शेयरधारकों के मूल्य को बढ़ने के लिये विभिन्न अवसरों का आकलन करती रहती है। जब भी कंपनी का निदेशक मंडल इस प्रकार के प्रस्ताव पर विचार करेगा, कंपनी इसकी सूचना देगी और सार्वजनिक सूचना प्रकाशन की शर्तों का पालन करेगी।’’
वोडाफोन आइडिया ने कहा कि फिलहान ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, जिस पर निदेशक मंडल विचार कर रहा हो।
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बयान के अनुसार, ‘‘हम यह दोहराना चाहते हैं कि कंपनी सेबी सूचीबद्धता नियमों का पालन करेगी और कीमत से जुड़ी सभी संवेदनशील सूचनाएं शेयर बाजारों के साथ साझा करेगी।
गगूल की हिस्सेदारी पर नजर की खबर से वोडाफोन आइडिया के शेयर में शुक्रवार को उछाल आया। पर कंपनी के उक्त बयान के बाद उसके शेयर में जो तेजी थी, उस पर कुछ विराम लगा। बंबई शेयर बाजार में अंत में यह करीब 13 प्रतिशत की बढ़त के साथ 6.56 रुपये पर बंद हुआ।
वोडाफोन आइडिया में गूगल की रूचि की रिपोर्ट के बाद कई विश्लेषकों ने कहा कि वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी का कोई भी संभावित निवेश नकदी संकट से जूझ रही दूरसंचार कंपनी के लिये रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगा। लेकिन यह इतना पर्याप्त नहीं है जिससे वोडाफोन आइडिया की समस्या दूर हो जाए।
क्रेडिट सुइस ने एक रिपार्ट में कहा कि किसी बहारी इकाई द्वारा नियंत्रणकारी हिस्सेदारी के अधिग्रहण या मौजूदा प्रवर्तकों द्वारा इक्विटी पूंजी निवेश समय की जरूरत है।
उसने कहा था, ‘‘हमें लगता है कि जबतक गूगल या कोई भी दूसरा निवेशक वोडाफोन आइडिया में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी खरीदने पर गौर नहीं करता, कंपनी का 2022-23 के बाद (उस समय स्पेक्ट्रम भुगतान के लिये मिली मोहलत समाप्त होगी) बाजार में बना रहना मुश्किल होगा।’’
गोल्डमैन सैक्श ने कहा था कि समायोजित सकल आय की स्थिति आी भी अनिश्चित बनी हुई है और यह कंपनी के शुद्ध 14 अरब डॉलर के कर्ज में 50 प्रतिशत का इजाफा कर सकता है। इस स्थिति में जबतक नियामकीय देनदारी पर चीजें साफ नहीं होती दूरसंचार कंपनी के लिये निवेशकों को आकर्षित करना आसान नहीं लगता।
वोडाफोन आइडिया वित्तीय दबाव में है और विशेषज्ञों ने बार-बार आगाह किया है कि कंपनी की दीर्घकाकलीन व्यवहार्यता को लेकर अंदेशा बना हुआ है।
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