देश की खबरें | एफडीआई नियमों के उल्लंघन का मामला दुर्भावनापूर्ण, केवल प्रताड़ित करने के लिए : ‘न्यूजक्लिक’
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नयी दिल्ली, सात नवंबर समाचार पोर्टल ‘न्यूजक्लिक’ ने विदेश से धन प्राप्त करने से जुड़े कानूनों के कथित उल्लंघन को लेकर उसके खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने का मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से अनुरोध करते हुए कहा कि उसके खिलाफ अभियोग पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण एवं उसे प्रताड़ित करने के इरादे से है, और अब इसका संस्थापक एक अन्य मामले में जेल में है।
समाचार पोर्टल ने कहा कि उसने किसी दिशानिर्देश या प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से जुड़े नियमों का उल्लंघन नहीं किया है। ‘न्यूजक्लिक’ ने पूर्व में, उसके खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा (इओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी और कथित धन शोधन के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले का विरोध किया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी के समक्ष दलील दी,‘‘किसी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है; किसी कर(कानून) का उल्लंघन नहीं हुआ है।’’
सिब्बल ने कहा, ‘‘यह पूरी तरह से अविश्वसनीय, दुर्भावनापूर्ण शिकायत है, जो एक मीडिया संस्थान को प्रताड़ित करने के लिए दर्ज की गई।’’ उन्होंने ‘न्यूजक्लिक’ के संस्थापक एवं प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ आतंक-रोधी कानून ‘गैर कानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम’ (यूएपीए) के तहत उनके खिलाफ दर्ज मामले में उनकी गिरफ्तारी के प्रति अपनी असहमति व्यक्त की।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ‘‘नयी प्राथमिकी में, उन्होंने कहा है कि धन चीन से आया...आप इस तरह से लोगों को जेल नहीं भेज सकते। उनकी उम्र 72 साल है।’’
सिब्बल ने दलील दी कि मौजूदा मामले में कोई अपराध का मामला नहीं बनता है, क्योंकि विदेशी धन एक विदेशी निवेशक से उपयुक्त कानून व दस्तूर का पालन करते हुए आया।
उन्होंने कहा, ‘‘आरबीआई(भारतीय रिजर्व बैंक) ने कहा है कि मैंने किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। फिर भी अभियोग जारी है। ईडी आगे बढ़ रही है। कानून मेरे पक्ष में है...मुझपर मुकदमा चलाया जा रहा है। इस देश में इससे अधिक कुछ भी दुर्भावनापूर्ण नहीं हो सकता।’’
सिब्बल ने कहा, ‘‘इसलिये गरीब लोग जेल में हैं (क्योंकि) समाचार पोर्टल सत्ता प्रतिष्ठान के खिलाफ है।’’
वकील ने दलील दी कि ‘न्यूजक्लिक’ को विदेशी धन मिलने से सरकारी खजाने को नुकसान होने का दावा (अदालत में) टिक नहीं सकता, क्योंकि यह एक निजी लेनदेन था।
दिल्ली पुलिस और ईडी के वकील ने दलील दी कि ‘प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट’ की प्रति मांगने संबंधी पोर्टल की अर्जी निरर्थक हो गई है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय पहले ही कह चुका है कि इसे उपलब्ध कराने की जरूरत नहीं है।
‘न्यूजक्लिक’ का स्वामित्व रखने वाली कंपनी पीपीके न्यूजक्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड ने 2021 में उच्च न्यायालय का रुख कर एफडीआई कानून के उल्लंघन के आरोपों को लेकर पोर्टल के खिलाफ आपराधिक मामले रद्द करने का अनुरोध किया था।
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि उक्त कंपनी को कानून का उल्लंघन करते हुए, मेसर्स वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी यूएसए से वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान 9.59 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि डिजिटल समाचार वेबसाइट में एफडीआई की 26 प्रतिशत ऊपरी सीमा से बचने के लिए कंपनी के शेयर का अत्यधिक मूल्य निर्धारित कर निवेश किया गया था।
पुरकायस्थ को दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने यूएपीए के तहत दर्ज एक अलग मामले में तीन अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। यह मामला चीन के समर्थन में दुष्प्रचार करने के लिए कथित तौर पर धन प्राप्त करने का है। वह न्यायिक हिरासत में हैं। मामले की सुनवाई आठ नवंबर को जारी रहेगी।
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(The above story first appeared on LatestLY on Nov 07, 2023 08:32 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

