देश की खबरें | रात में हाई-स्पीड ट्रेन में स्थिर गति नियंत्रण प्रणाली के उपयोग पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए:लोको पायलट

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. लोको पायलट और उनके संगठनों ने ‘पुश-बटन स्थिर गति नियंत्रण प्रणाली’ (बीपीसीएस) के उपयोग पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग की है, जो इंजन चालक को देश के कुछ रेलवे जोन में रात के दौरान ट्रेन की वांछित गति तय करने की अनुमति देता है।

नयी दिल्ली, 18 अप्रैल लोको पायलट और उनके संगठनों ने ‘पुश-बटन स्थिर गति नियंत्रण प्रणाली’ (बीपीसीएस) के उपयोग पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग की है, जो इंजन चालक को देश के कुछ रेलवे जोन में रात के दौरान ट्रेन की वांछित गति तय करने की अनुमति देता है।

लोको पायलट ने कहा कि बीपीसीएस एक कम्प्यूटरीकृत प्रणाली है जो सभी हाई-स्पीड ट्रेन इंजनों में उपलब्ध है, जो उन्हें किसी विशेष बिंदु पर ट्रेन की गति तय करने में मदद करती है।

एक लोको पायलट ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘‘ट्रेन मार्ग के कुछ हिस्से ऐसे होते हैं, जहां काफी समय तक स्थायी गति प्रतिबंध 130 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होता है। ऐसे मामले में लोको पायलट गति को 130 किमी प्रति घंटे पर तय कर सकता है और सिग्नल पहलुओं और अन्य महत्वपूर्ण मापदंडों जैसे सुरक्षा मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर सकता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘संबंधित अनुसंधान और सुरक्षा प्राधिकरण जैसे अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) ने रात में इसके उपयोग पर कभी कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। हालांकि, उत्तर मध्य रेलवे जैसे कुछ रेलवे जोन ने इसके रात के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इससे लोको पायलट को काफी असुविधा हो रही है।’’

उत्तर मध्य रेलवे जोन के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) शशिकांत त्रिपाठी ने कहा कि रात के समय गति नियंत्रण प्रणाली के उपयोग पर प्रतिबंध इसलिए लगाए गए हैं क्योंकि यह देखा गया है कि कुछ लोको पायलट बीपीसीएस प्रणाली का उपयोग करने के बाद बहुत अधिक आराम की स्थिति में आ जाते हैं और सावधानी नहीं बरतते।

त्रिपाठी ने कहा, ‘‘हमने पाया कि कुछ मामलों में लोको पायलट झपकी ले लेते हैं जिसके बाद हमने रात में इसके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया। हालांकि, दिन के समय वे जब चाहें इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।’’

कई लोको पायलट ने सवाल उठाया कि जब दक्षिणी भागों में अन्य रेलवे जोन में इस तरह के प्रतिबंध नहीं हैं तो उत्तरी राज्यों में ऐसे ‘‘असंगत मानदंड’’ क्यों अपनाए जा रहे हैं।

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