देश की खबरें | केरल में हाई स्पीड रेल परियोजना के लिये भूमि अधिग्रहण के बारे में आशंका बेबुनियाद :के-रेल
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तिरूवनंतपुरम से कासरगोड के बीच ‘सेमी हाई स्पीड रेल कॉरीडोर’ पर काम कर रहे केरल विकास निगम लिमिटेड (के-रेल) ने कहा है कि इस परियोजना के बारे में आशंका पूरी तरह से बेबुनियाद है।
तिरूवनंतपुरम (केरल), 26 जुलाई तिरूवनंतपुरम से कासरगोड के बीच ‘सेमी हाई स्पीड रेल कॉरीडोर’ पर काम कर रहे केरल विकास निगम लिमिटेड (के-रेल) ने कहा है कि इस परियोजना के बारे में आशंका पूरी तरह से बेबुनियाद है।
इस परियोजना के पूरी होने पर तिरूवनतंपुरम और कासरगोड के बीच यात्रा चार घंटे में पूरी की जा सकेगी।
के-रेल के प्रबंध निदेशक वी अजीत कुमार ने कहा, ‘‘मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण के बारे में आशंका जताई गई है और कुछ स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन कराये गये।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन रेल मार्ग का निर्धारण इस तरह से किया गया है कि यह सबसे कम आबादी वाले इलाकों से गुजरे और भूमि अधिग्रहण की न्यूनतम संभावना हो। वहीं, अधिग्रहित भूमि के लिये बाजार मूल्य से दो से चार गुना अधिक मुआवजा दिया जाएगा। ’’
के-रेल, रेल मंत्रालय और केरल सरकार का एक संयुक्त उद्यम है।
कुमार ने कहा, ‘‘भूमि अधिग्रहण और मुआवजा तथा पुनर्वास की प्रक्रिया भूमि अधिग्रहण अधिनयिम, 2013 के प्रावधानों के तहत की जाएगी। इसके बारे में दुष्प्रचार पूरी तरह से बेबुनियाद है।’’
उन्होंने कहा कि ‘सिल्वरलाइन’ को आबादी बहुल इलाकों से दूर रखा गया है। मकान, अन्य भवन और यहां तक पेड़ों के लिये भी बाजार मूल्य से दोगुना मुआजवा दिया जाएगा।
सिल्वरलाइन, मौजूदा तिरूर से कासरगोड रेल मार्ग के समानांतर होगी।
परियोजना के तहत 529.45 किमी रेल मार्ग बिछाया जाएगा, जो 11 जिलों से होकर गुजरेगा।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)