देश की खबरें | हरिद्वार के चंडी देवी मंदिर में ‘रिसीवर’ नियुक्त करने को शीर्ष अदालत में चुनौती दी गयी

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नयी दिल्ली, 24 जुलाई हरिद्वार के मां चंडी देवी मंदिर का प्रबंधन देखने के लिए बदरी केदार मंदिर समिति को एक ‘रिसीवर’ नियुक्त करने का दिये गये आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए उसके (मां चडी देवी मंदिर के) सेवायत ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया है।

‘सेवायत’ से तात्पर्य उन पुजारियों से है जो मंदिरों के दैनिक अनुष्ठानों और प्रबंधन में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं।

महंत भवानी नंदन गिरि ने शीर्ष अदालत में दाखिल अपनी याचिका में कहा कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बिना किसी साक्ष्य और शिकायत के मंदिर का नियंत्रण एक समिति को सौंप दिया, जबकि उसके द्वारा ही 2012 में ही गठित हरिद्वार के जिलाधिकारी और एसएसपी की एक समिति पहले से है।

अधिवक्ता अश्विनी दुबे के माध्यम से दायर याचिका में गिरि ने दलील दी कि ‘रिसीवर’ नियुक्त करने का निर्देश एक आपराधिक मामले में एक आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया था।

याचिका में कहा गया हरिद्वार में मां चंडी देवी मंदिर की स्थापना आठवीं शताब्दी में जगद्गुरु श्री आदि शंकराचार्य द्वारा की गई थी और तब से याचिकाकर्ता के पूर्वज सेवायत के रूप में इसका प्रबंधन और देखभाल करते आ रहे हैं।

न्यायालय में इस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की उम्मीद है।

याचिका में कहा गया है कि न तो एक भी शिकायत की गई और न ही उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की समिति द्वारा कभी कुप्रबंधन या गबन का सवाल उठाया गया है।

याचिका में कहा गया है, ‘‘उच्च न्यायालय ने मनमाने एवं अवैध निर्देश पारित किए हैं जो दलीलों से परे हैं। इस संबंध में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन किया गया,कोई विशेष राहत नहीं दी गयी, याचिकाकर्ता सेवायत/मुख्य न्यासी को सुना नहीं गया।’’

याचिकाकर्ता ने कहा कि उच्च न्यायालय ने कोई नोटिस जारी नहीं किया , संबंधित आदेश जारी कर दिये।

उच्च न्यायालय ने यह आदेश रीना बिष्ट नामक महिला की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। रीना बिष्ट ने मंदिर के मुख्य पुजारी रोहित गिरि की ‘सहजीवन साथी’ होने का दावा किया था।

गिरि की पत्नी गीतांजलि ने 21 मई को अपने पति, रीना बिष्ट और सात अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया गया था कि बिष्ट ने 14 मई को उनके बेटे को गाड़ी से कुचलने का प्रयास किया था।

उसी दिन, गिरि को पंजाब पुलिस ने छेड़छाड़ के एक अलग मामले में गिरफ्तार कर लिया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।

उच्च न्यायालय ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा, ‘‘मंदिर के न्यासी एक हानिकारक माहौल बना रहे हैं... और न्यास में पूरी तरह से कुप्रबंधन है। इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि दान की राशि का दुरुपयोग हो सकता है।’’

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