देश की खबरें | शीर्ष अदालत ने हत्या मामले में हाईकोर्ट का फैसला दरकिनार किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. शीर्ष अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें एक व्यक्ति को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था। उच्च न्यायालय की ओर से जारी आदेश के तरीके को लेकर शीर्ष अदालत ने कहा कि हत्या के मामलों में पहली अपील को इस तरह नहीं निपटा सकते।

नयी दिल्ली, 16 जनवरी शीर्ष अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें एक व्यक्ति को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था। उच्च न्यायालय की ओर से जारी आदेश के तरीके को लेकर शीर्ष अदालत ने कहा कि हत्या के मामलों में पहली अपील को इस तरह नहीं निपटा सकते।

उच्चतम न्यायालय ने पाया कि उच्च न्यायालय ने 20 मार्च 2020 के आदेश में चार पंक्तियों वाले पैराग्राफ में यह निष्कर्ष निकाला था कि याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज कर दिया जाए। याचिकाकर्ता की उम्र 80 साल से अधिक है।

न्यायमूर्ति एसके कौल और एमएम सुंदरेश की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने की अनुमति देते हुए इस मामले को उच्च न्यायालय में दोबारा विचार के लिए भेज दिया। उच्च न्यायालय में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत दोष सिद्धि के खिलाफ अपील की गई थी। लेकिन 2 मार्च, 2020 के आदेश में गवाहों की गवाही को ध्यान में रखते हुए उच्च न्यायालय ने अपील को खारिज कर दिया था।

शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए कहा, ‘‘हमारा मानना ​​है कि हत्या के मामले में पहली अपील को इस तरह से नहीं निपटाया जा सकता है।’’ शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि दोषी ठहराया गया व्यक्ति उच्च न्यायालय के समक्ष कार्यवाही जारी रहने तक जमानत पर रहेगा।

भिवानी की एक सत्र अदालत ने अक्टूबर 2005 के आदेश में 80 वर्षीय व्यक्ति को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, जिसके खारिज होने के बाद उच्चतम न्यायालय में अपील की गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने अक्टूबर 2003 में एक व्यक्ति पर कुल्हाड़ी से वार किया था जिससे पीड़ित की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था। पुलिस ने दावा किया था कि हत्या से चार दिन पहले शराब पीने के बाद आरोपी और जान गंवाने वाले व्यक्ति के बीच झगड़ा हुआ था। सुनवाई के दौरान आरोपी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि उसे झूठा फंसाया गया है।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अपने मामले को बिना किसी संदेह के साबित कर चुका है और निचली अदालत के तर्कसंगत फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है।

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