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जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में 70 प्रतिशत की कमी आई: गृह मंत्रालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. नरेन्द्र मोदी सरकार के तहत 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद संबंधी घटनाओं में 70 प्रतिशत से अधिक की कमी देखी गई है। संसदीय समिति के समक्ष केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रस्तुतीकरण में यह जानकारी दी गई है।

जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में 70 प्रतिशत की कमी आई: गृह मंत्रालय
Indian Army | PTI

नयी दिल्ली, 13 नवंबर: नरेंद्र मोदी सरकार के तहत 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद संबंधी घटनाओं में 70 प्रतिशत से अधिक की कमी देखी गई है. संसदीय समिति के समक्ष केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रस्तुतीकरण में यह जानकारी दी गई है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुतीकरण देते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में आतंकवाद संबंधी मामलों में कमी आने के बावजूद लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी समूहों से खतरा अभी भी बना हुआ है.

केंद्र ने पांच अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था, जो जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता था. तत्कालीन राज्य जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया था. दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में कानून और व्यवस्था अब सीधे केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है.

मोहन और उनके अधिकारियों की टीम ने समिति को बताया कि मोदी सरकार के लिए नागरिक सुरक्षा प्रमुख चिंता का विषय रही है और सुरक्षा एजेंसियां ​​इस पर पूरा जोर दे रही हैं. तुलनात्मक आंकड़े देते हुए गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि 2019 में आतंकवाद से संबंधित घटनाओं में 50 नागरिक मारे गए थे.

सूत्रों ने बताया कि इस साल अब तक हताहतों की संख्या घटकर 14 रह गई है. वर्ष 2023 में आतंकवादी घटनाओं में पांच नागरिक मारे गए थे जो 2024 की तुलना में लगभग तीन गुना कम है. वर्ष 2019 में नागरिकों पर 73 हमले हुए और इस साल अब तक यह आंकड़ा 10 है.

मंत्रालय ने कहा कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर में भारत विरोधी तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के अलावा आतंकवादी समर्थन और आतंकवाद के वित्तपोषण नेटवर्क को खत्म करना चाहती है. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2019 में जम्मू कश्मीर में 286 आतंकवाद संबंधी घटनाएं दर्ज की गई थीं. नवंबर के पहले सप्ताह तक यह आंकड़ा घटकर 40 रह गया.

सुरक्षा बलों पर हमलों के संबंध में मंत्रालय ने कहा कि 2019 में ऐसी 96 घटनाएं दर्ज की गई थीं.

आंकड़ों के अनुसार 2020 में यह बढ़कर 111 हो गई, लेकिन तब से इसमें लगातार गिरावट आई है और सुरक्षा बलों पर इस तरह के हमलों की संख्या 2021 में घटकर 95, 2022 में 65, 2023 में 15 रही. 2024 में अब तक यह आंकड़ा पांच है.

सुरक्षा बलों के हताहत होने के बारे में मंत्रालय ने कहा कि 2019 में विभिन्न घटनाओं में 77 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गये. इसने कहा कि 2020 में कुल 58 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए, 2021 में 29, 2022 में 26, 2023 में 11 और 2024 में अब तक सात सुरक्षाकर्मी शहीद हुए.

गृह मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ की कोशिशें भी 2019 में 141 से घटकर 2024 में अब तक सिर्फ तीन रह गई हैं. हालांकि, इस साल अब तक मारे गए आतंकवादियों की संख्या भी 2019 में 142 से घटकर 44 रह गई है. नक्सली हिंसा पर गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि 2014 में 310 नागरिक और सुरक्षाकर्मी मारे गए थे. वर्ष 2022 में हताहतों की संख्या घटकर 61 रह गई. उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में 2014 में 232 नागरिक और सुरक्षाकर्मी मारे गए थे जबकि 2022 में यह आंकड़ा सिर्फ आठ रह गया है.

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(The above story first appeared on LatestLY on Nov 13, 2024 10:36 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).