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South Africa: तेम्बा बावुमा ने छठी कक्षा में देख लिया था दक्षिण अफ्रीकी टीम को आगे ले जाने का सपना

दक्षिण अफ्रीका की सीमित ओवरों के कप्तान के रूप में और अब तक केवल 16 वनडे खेलने वाले (उन्होंने हालांकि 47 टेस्ट मैच खेले हैं) बावुमा की शांतचित लेकिन ठोस बल्लेबाजी ने उनकी टीम की भारत के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में जीत में अहम भूमिका निभायी और सीमित ओवरों के कप्तान के रूप में मैदान पर उनकी जीवंत उपस्थिति ने नयी उम्मीद जगायी है.

South Africa: तेम्बा बावुमा ने छठी कक्षा में देख लिया था दक्षिण अफ्रीकी टीम को आगे ले जाने का सपना
दक्षिण अफ्रीका (Photo Credits: Twitter/ICC)

नई दिल्ली: यह 2001 की बात है. केपटाउन (Cape Town) के प्रतिष्ठित ‘साउथ अफ्रीकन कॉलेज स्कूल्स’ (SACS) ने विद्यार्थियों को एक ‘प्रोजेक्ट’ दिया जिसका विषय था, ‘अगले 15 साल में मैं स्वयं को कहां देखता हूं’. वह 11 साल का एक बच्चा था जिसके निबंध को स्कूल की गृह पत्रिका में जगह मिली थी. यह बच्चा कोई और नहीं बल्कि वर्तमान में दक्षिण अफ्रीका (South Africa) की सीमित ओवरों की टीम के कप्तान तेम्बा बावुमा (Temba Bavuma) थे, जिन्होंने लिखा था, ‘‘मैं अगले 15 साल में खुद को मिस्टर माबेकी (दक्षिण अफ्रीका के तत्कालीन राष्ट्रपति) के साथ हाथ मिलाते हुए देख रहा हूं जो मुझे दक्षिण अफ्रीका की मजबूत टीम तैयार करने के लिये बधाई दे रहे हैं.’’ IND vs SA ODI Series: टीम इंडिया को वनडे सीरीज हारने के बाद दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज गेंदबाज केशव महाराज ने कहा- जय श्री राम

छठी कक्षा में पढ़ने वाले बावुमा ने आगे लिखा, ‘‘अगर मैं ऐसा कर पाया तो मैं निश्चित तौर पर अपने प्रशिक्षकों और माता पिता के समर्थन तथा विशेषकर अपने दो ‘अंकल’ का आभारी रहूंगा जिन्होंने मुझे इस लायक बनाया.’’

बावुमा के इस निबंध को तब स्थानीय मीडिया ने भी खूब तवज्जो दी थी. कई लोगों ने तब किशोरावस्था की तरफ बढ़ रहे इस बच्चे की बातों को गंभीरता से नहीं लिया होगा लेकिन इसके ठीक 15 साल बाद 2016 में जब बावुमा टेस्ट क्रिकेट में शतक जड़ने वाले पहले अश्वेत दक्षिण अफ्रीकी बने तो माबेकी राष्ट्रपति पद से हट चुके थे.

लेकिन बमुश्किल 62 इंच लंबे बावुमा ने न सिर्फ अपनी भविष्यवाणी सच की बल्कि उन्होंने दक्षिण अफ्रीका का कद भी बढ़ा दिया जो रंगभेद की नीति समाप्त होने के तीन दशक बाद भी पुराने दौर की मर्मांतक पीड़ा से उबरने की कोशिश कर रहा है.

और जाने या अनजाने, बावुमा राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के पहले अश्वेत कप्तान के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं जो कि केवल एक प्रतीक नहीं बल्कि ऐसे समाज के लिये उम्मीद की किरण है जो कि उस समाज से घुलने मिलने का प्रयास कर रहा है जिसने उसे सदियों तक दबाकर रखा था.

दक्षिण अफ्रीका की सीमित ओवरों के कप्तान के रूप में और अब तक केवल 16 वनडे खेलने वाले (उन्होंने हालांकि 47 टेस्ट मैच खेले हैं) बावुमा की शांतचित लेकिन ठोस बल्लेबाजी ने उनकी टीम की भारत के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में जीत में अहम भूमिका निभायी और सीमित ओवरों के कप्तान के रूप में मैदान पर उनकी जीवंत उपस्थिति ने नयी उम्मीद जगायी है.

और ऐसा क्यों न हो. आखिर उन्होंने विराट कोहली, केएल राहुल, शिखर धवन, ऋषभ पंत और जसप्रीत बुमराह जैसे शीर्ष खिलाड़ियों से सजी भारतीय टीम के खिलाफ आगे बढ़कर नेतृत्व किया है. यह मामूली उपलब्धि नहीं है.

सिपोकाज़ी सोकानीले दक्षिण अफ्रीकी पुरुष टीम से जुड़ी बेहद लोकप्रिय मीडिया मैनेजर हैं और उन्हें बावुमा वास्तविक नेतृत्वकर्ता लगते हैं. उन्होंने बावुमा को ड्रेसिंग रूम में एक खिलाड़ी ही नहीं एक व्यक्ति के रूप में भी देखा है. सिपोकाजी ने पीटीआई- से कहा, ‘‘तेम्बा वास्तविक नेतृत्वकर्ता हैं और जो काम वह स्वयं करने की स्थिति में न हों उसकी किसी से उम्मीद भी नहीं करते हैं.’’

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(The above story first appeared on LatestLY on Jan 25, 2022 04:33 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).