जरुरी जानकारी | टाटा पावर का चालू वित्त वर्ष में 12,000 करोड़ रुपये निवेश का इरादा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. बिजली उत्पादक कंपनी टाटा पावर ने वित्त वर्ष 2023-24 में अपना पूंजीगत व्यय दोगुना कर 12,000 करोड़ रुपये करने की मंशा जताई है। कंपनी का इरादा अक्षय ऊर्जा, वितरण, पारेषण और सौर उपकरण विनिर्माण क्षमता पर ध्यान केंद्रित करने का है।

नयी दिल्ली, 19 जून बिजली उत्पादक कंपनी टाटा पावर ने वित्त वर्ष 2023-24 में अपना पूंजीगत व्यय दोगुना कर 12,000 करोड़ रुपये करने की मंशा जताई है। कंपनी का इरादा अक्षय ऊर्जा, वितरण, पारेषण और सौर उपकरण विनिर्माण क्षमता पर ध्यान केंद्रित करने का है।

टाटा पावर के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन ने सोमवार को कंपनी की 104वीं सालाना आम बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘वृद्धि के लक्ष्य को पाने के लिए आपकी कंपनी की योजना चालू वित्त वर्ष में 12,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की है। यह 2022-23 की तुलना में दोगुना है।’’

उन्होंने बताया कि यह निवेश चार गीगावॉट के विनिर्माण संयंत्र, निर्माणाधीन अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं, पारेषण और वितरण कारोबार में ओडिशा, दिल्ली और मुंबई के साथ नए अवसरों में किया जाएगा।

उन्होंने शेयरधारकों को बताया कि कंपनी इन परियोजनाओं का वित्तपोषण काफी हद तक अपने आंतरिक संसाधनों से करेगी।

चंद्रशेखरन ने कहा कि तमिलनाडु में चार गीगावॉट क्षमता का सेल और मॉड्यूल विनिर्माण संयंत्र पटरी पर है। इसकी मॉड्यूल लाइन के अक्टूबर, 2023 तक तैयार होने की उम्मीद है जबकि सेल लाइन साल के अंत तक तैयार होगी।

उन्होंने कहा कि टाटा पावर देश में बिजली वितरण कारोबार पर भी ध्यान केंद्रित करेगी और बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के लिए बोली लगाएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘कंपनी का डिस्कॉम के पुनरुद्धार का काफी सफल रिकॉर्ड रहा है। नीतिगत सुधारों के साथ जब भी निजीकरण के अवसर उपलब्ध होंगे कंपनी उनमें शामिल होगी।’’

चंद्रशेखरन ने बताया कि प्रदर्शन के आधार पर कंपनी के निदेशकों ने 200 प्रतिशत लाभांश यानी एक रुपये के शेयर पर दो रुपये के लाभांश वितरण की सिफारिश की है।

उन्होंने कहा कि बेहतर प्रदर्शन से बीते वित्त वर्ष में कंपनी का एकीकृत राजस्व 32 प्रतिशत बढ़कर 56,033 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो 2021-22 में 42,576 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष के दौरान कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ 77 प्रतिशत बढ़कर 3,810 करोड़ रुपये रहा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 2,156 करोड़ रुपये था।

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