देश की खबरें | तमिलनाडु : शिक्षा को लेकर द्रमुक - भाजपा में तकरार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तमिलनाडु भाजपा प्रमुख के अन्नामलाई ने मंगलवार को राज्य में सत्तारूढ़ द्रमुक की आलोचना करते हुए दावा किया कि बच्चों के भविष्य की तुलना में उस पार्टी के लिए राजनीति प्राथमिकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) पर बढ़ते वाकयुद्ध में, द्रमुक उप महासचिव कनिमोझी ने अन्नामलाई को चुनौती देते हुए कहा कि ‘यदि उन्हें सही मायने में चिंता है’ तो वह सुनिश्चित करें कि केंद्र शिक्षा के लिए धनराशि जारी करे।
चेन्नई, चार मार्च तमिलनाडु भाजपा प्रमुख के अन्नामलाई ने मंगलवार को राज्य में सत्तारूढ़ द्रमुक की आलोचना करते हुए दावा किया कि बच्चों के भविष्य की तुलना में उस पार्टी के लिए राजनीति प्राथमिकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) पर बढ़ते वाकयुद्ध में, द्रमुक उप महासचिव कनिमोझी ने अन्नामलाई को चुनौती देते हुए कहा कि ‘यदि उन्हें सही मायने में चिंता है’ तो वह सुनिश्चित करें कि केंद्र शिक्षा के लिए धनराशि जारी करे।
कनिमोझी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि तमिलनाडु कभी भी 'भाजपा के दुष्प्रचार, आर्थिक रूप से उसका गला दबाने और हिंदी थोपने के एजेंडे' को स्वीकार नहीं करेगा।
कनिमोझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा “दुनिया जानती है कि भाजपा कैसे आंकड़ों में हेरफेर करती है। डॉ परकला प्रभाकर ने ‘द क्रुक्ड टिम्बर ऑफ न्यू इंडिया: एसेज ऑन ए रिपब्लिक इन क्राइसिस’ में इसका पर्दाफाश किया है।”
थूथुकुडी से द्रमुक सांसद ने कहा कि भाजपा चुनिंदा आंकड़ों का हवाला देकर और अपने प्रचार के लिए संख्याओं को तोड़-मरोड़ कर पेश करके फलती-फूलती है। उन्होंने कहा कि एएसईआर के आंकड़े 'गढ़े हुए' हैं और यही वजह है कि द्रमुक सरकार शिक्षा नीतियों के वास्तविक प्रभाव पर अपना सर्वेक्षण कर रही है।
कनिमोझी ने कहा कि कि 2025 के आर्थिक सर्वेक्षण में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से शिक्षा में क्रांति लाने के लिए तमिलनाडु की प्रशंसा की गई है।
उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों के विपरीत, द्रमुक ने अपने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखा है।
कनिमोझी ने पोस्ट में कहा, ‘‘आप तमिलनाडु के छात्रों की परवाह करने का दावा करते हैं - तो फिर आपकी सरकार ने तमिलनाडु को मिलने वाले समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए) के 2,152 करोड़ रुपये क्यों रोक रखे हैं? अगर आपको वाकई परवाह है, तो हमें उपदेश देने के बजाय अपनी केंद्र सरकार से कहें कि वह यह राशि जारी करे।’’
उन्होंने केंद्र पर केंद्रीय विद्यालयों से जर्मन और अन्य विदेशी ओं को कथित तौर पर हटाने और हिंदी और संस्कृत थोपने, छात्रों को वैश्विक संपर्क से वंचित करने और भाजपा के विभाजनकारी वैचारिक एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया।
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