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देश की खबरें | नफरती भाषण के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करें : न्यायालय ने तीन राज्यों से कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने संविधान में भारत के धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की परिकल्पना का हवाला देते हुए शुक्रवार को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों को निर्देश दिया कि वे नफरत भरे भाषणों के दोषियों के खिलाफ शिकायत दर्ज होने का इंतजार किये बिना सख्त कार्रवाई करें।

देश की खबरें | नफरती भाषण के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करें : न्यायालय ने तीन राज्यों से कहा

नयी दिल्ली, 21 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने संविधान में भारत के धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की परिकल्पना का हवाला देते हुए शुक्रवार को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों को निर्देश दिया कि वे नफरत भरे भाषणों के दोषियों के खिलाफ शिकायत दर्ज होने का इंतजार किये बिना सख्त कार्रवाई करें।

शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की देरी अदालत की अवमानना के दायरे में आएगी।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘भारत का संविधान एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र और बंधुत्व... सम्मान के साथ भाईचारा की परिकल्पना करता है...राष्ट्र की एकता और अखंडता प्रस्तावना में निहित मार्गदर्शक सिद्धांतों में से एक है।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘जब तक विभिन्न धर्मों के लोग सद्भाव के साथ रहने में सक्षम नहीं होंगे, तब तक बंधुत्व नहीं हो सकता है।’’

याचिकाकर्ता ने इस बात का उल्लेख किया कि विभिन्न दंड प्रावधानों के बावजूद, कोई कार्रवाई नहीं की गई है और संवैधानिक सिद्धांतों पर अमल की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें लगता है कि इस अदालत के पास मौलिक अधिकारों और संविधान की रक्षा करने का दायित्व है, जहां कानून का शासन बनाए रखा जाता है।”

न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने पत्रकार शाहीन अब्दुल्ला की याचिका पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को भी नोटिस जारी किये।

पीठ ने कहा कि राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को बनाए रखने के लिए नफरती भाषण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, भले ही वे किसी भी धर्म के हों।

न्यायालय ने कहा, ‘‘प्रतिवादी संख्या दो, तीन और चार (तीन राज्य) अपना जवाब दाखिल करेंगे कि उल्लेखित भाषणों के लिए क्या कार्रवाई की गई है। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि जब भी कोई नफरती भाषण या कार्य होता है और शिकायत दर्ज नहीं की जाती है, तो ऐसे मामलों में स्वत: संज्ञान लिया जाएगा और शिकायतों का इंतजार किए बिना कार्रवाई की जाएगी।’’

पीठ ने कहा, ‘‘प्रतिवादी उचित कार्रवाई के लिए अपने अधीनस्थों को निर्देश जारी करेंगे और इस तरह के घृणास्पद भाषण देने वाले व्यक्ति के धर्म की परवाह किए बिना ऐसी कार्रवाई की जाए, ताकि प्रस्तावना में परिकल्पित इस देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को बनाए रखा जा सके।’’

अब्दुल्ला ने शीर्ष अदालत का रुख किया और केंद्र और राज्यों को देश भर में घृणा अपराधों और घृणास्पद भाषणों की घटनाओं की स्वतंत्र, विश्वसनीय और निष्पक्ष जांच शुरू करने का निर्देश देने की मांग की।

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(The above story first appeared on LatestLY on Oct 21, 2022 08:02 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).