देश की खबरें | सांसदों का निलंबन संसद की सुरक्षा में चूक के मुद्दे से जुड़ा नहीं: लोकसभा अध्यक्ष बिरला

नयी दिल्ली, 16 दिसंबर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को उन दावों को खारिज कर दिया कि विपक्षी दलों के 13 सदस्यों का निलंबन हालिया सुरक्षा चूक पर उनके विरोध प्रदर्शन से जुड़ा था और याद दिलाया कि पिछली बार ऐसी घटनाओं पर सदन ने अनुकरणीय एकजुटता और सामूहिक संकल्प प्रदर्शित किया था।

वर्ष 2001 में संसद पर आतंकवादी हमले की बरसी पर बीते बुधवार को एक बड़ी सुरक्षा चूक का मामला सामने आया जब दो व्यक्ति (सागर शर्मा और मनोरंजन डी) शून्यकाल के दौरान दर्शक दीर्घा से लोकसभा के अंदर कूद गए और ‘केन’ से पीले रंग का धुआं छोड़ा।

विपक्षी दलों के विरोध के कारण संसद की कार्यवाही बाधित होने पर बिरला ने सभी सांसदों को पत्र लिखकर सूचित किया कि उन्होंने संसद परिसर में सुरक्षा के सभी पहलुओं की समीक्षा करने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस कार्य योजना बनाने के संबंध में ‘‘उच्चाधिकार प्राप्त समिति’’ का गठन किया है।

यह समिति केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) महानिदेशक की अध्यक्षता वाले पैनल के अतिरिक्त है, जो घटना की जांच कर रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वह इसकी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सदन के साथ साझा करेंगे।

विपक्षी दलों द्वारा गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग, और कुछ दलों द्वारा उनके इस्तीफे पर जोर के बीच बिरला ने कहा कि संसद भवन संपदा की सुरक्षा संसद के अधिकार क्षेत्र में आती है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह, आपके सुझावों के अनुरूप सुरक्षा उपायों पर एक विस्तृत कार्य योजना बनाना संसद की जिम्मेदारी है और उसके बाद उनका कार्यान्वयन भी संसद की जिम्मेदारी है।’’

बिरला ने कहा कि 13 विपक्षी सदस्यों को ‘‘मूलत: इसकी गरिमा बनाए रखने के लिए’’ सदन से निलंबित किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी संसद के नए भवन के उद्घाटन के समय, हमने संकल्प लिया था कि हम सदन के अंदर तख्तियां लाने से परहेज करेंगे; हम सदन के भीतर हंगामा नहीं करेंगे।’’

बिरला ने कहा कि यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ सदस्य और राजनीतिक दल इन सदस्यों को निलंबित करने के सदन के फैसले को सुरक्षा चूक से जोड़ रहे हैं, जब 13 दिसंबर को दो व्यक्ति दर्शक दीर्घा से सदन के कक्ष में कूद गए थे।

विपक्षी दलों ने यह कहते हुए निलंबन की आलोचना की है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद प्रताप सिम्हा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिन्होंने अपने साथ धुएं के डिब्बे लाने वाले दो आरोपियों के लिए पास का इंतजाम कराने में मदद की, जबकि उनके सदस्यों को इस मुद्दे को उठाने के लिए निलंबित कर दिया गया।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘यह अनुचित है। माननीय सदस्यों के निलंबन और 13 दिसंबर, 2023 को हुई घटना के बीच कोई संबंध नहीं है।’’

बिरला ने कहा कि उन्होंने उसी दिन सभी दलों के नेताओं के साथ सुरक्षा मुद्दे पर चर्चा की थी और कहा कि बैठक के दौरान दिए गए कुछ महत्वपूर्ण सुझावों को तुरंत लागू किया गया था।

विपक्ष को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि पिस्तौल लेकर आने, नारे लगाने, दर्शक दीर्घा से कूदने और पर्चे फेंकने जैसी घटनाएं पहले भी होती रही हैं।

उन्होंने आंध्र प्रदेश को विभाजित कर तेलंगाना राज्य बनाने की प्रक्रिया के दौरान देखे गए अराजक दृश्यों का संदर्भ देते हुए कहा कि देश ने ऐसी घटना भी देखी है जब कुछ सदस्य सदन के अंदर काली मिर्च स्प्रे ले गए थे।

बिरला ने कहा कि ऐसी सभी घटनाओं के समय सदन ने अनुकरणीय एकजुटता प्रदर्शित की और ऐसी घटनाओं के खिलाफ अपना सामूहिक संकल्प व्यक्त किया।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि देश के लोग सदन की कार्यवाही के दौरान अनुचित आचरण और व्यवधान को ठीक नहीं मानते। उन्होंने कहा, ‘‘इस संदर्भ में सदन को माननीय सदस्यों को निलंबित करने की सख्त कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा।’’

विपक्ष द्वारा अपना विरोध तेज करने की संभावना के बीच, बिरला ने सभी सदस्यों से राष्ट्र के प्रति उनके कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने का आग्रह किया।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा मानदंडों के उल्लंघन की कई घटनाएं अतीत में हुई हैं, जिनमें 1991-94 के बीच आगंतुकों के लोकसभा कक्ष में कूदने के तीन मामले भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि लोगों द्वारा दर्शक दीर्घाओं से नारे लगाने और पर्चे फेंकने के एक दर्जन मामले सामने आए। वर्ष 1983 में, एक आगंतुक ने नारे लगाए और राज्यसभा सदस्यों के कक्ष में चप्पल फेंकी। संसद के उच्च सदन में आगंतुकों द्वारा नारे लगाने और पर्चे फेंकने के कम से कम छह मामले आए हैं।

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