यह पहली बार है जब खमनेई ने छात्राओं को संदिग्ध रूप से जहर देने की घटनाओं पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की है। ये घटनाएं पिछले साल के अंत में सामने आनी शुरू हुई और सैकड़ों बच्चियां बीमार पड़ चुकी हैं।
ईरानी अधिकारियों ने हाल के सप्ताह में इन घटनाओं को स्वीकार किया लेकिन इस पर जानकारी नहीं दी कि इन घटनाओं के पीछे कौन हो सकता है या इसमें किसी तरह के रसायन का इस्तेमाल किया गया।
पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान के विपरीत ईरान में धार्मिक चरमपंथियों द्वारा महिलाओं की शिक्षा को निशाना बनाए जाने का कोई इतिहास नहीं है।
सरकारी आईआरएनए समाचार एजेंसी के अनुसार खमनेई ने कहा, ‘‘अगर छात्राओं को जहर देने की बात साबित हो जाती है तो इस अपराध के लिए जिम्मेदार लोगों को मृत्युदंड दिया जाना चाहिए और उनके लिए कोई माफी नहीं होगी।’’
प्राधिकारियों ने बताया कि नवंबर से लेकर अब तक ईरान के 30 में से 21 प्रांत में 50 से अधिक विद्यालयों में ये हमले हुए।
ईरान के गृह मंत्री अहमद वाहिदी ने कहा कि जांचकर्ताओं ने छानबीन के दौरान संदिग्ध नमूने इकट्ठा किए हैं। उन्होंने लोगों से शांति बरतने का आह्वान किया और अज्ञात शत्रुओं पर ईरान को कमजोर करने के लिए डर फैलाने का आरोप लगाया।
वाहिदी ने कहा कि ज़हर की संदिग्ध घटनाओं से कम से कम 52 स्कूल प्रभावित हुए हैं। ईरान की मीडिया ने स्कूलों की संख्या 60 बताई है। कम से कम एक बाल विद्यालय भी प्रभावित हुआ है।
ऐसा बताया जा रहा है कि जिन छात्राओं को संदिग्ध रूप से जहर दिया गया है उन्होंने सिर में दर्द, घबराहट और सुस्ती महसूस होने की शिकायत की है।
खबरों से पता चला है कि नवंबर के बाद से कम से कम 400 स्कूली बच्चे बीमार पड़े हैं।
वाहिदी ने अपने बयान में बताया कि दो लड़कियां अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। बहरहाल, अभी किसी की मौत होने की सूचना नहीं है।
रविवार को और हमले होने की खबरें आने के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में बच्चियां पैरों, पेट में दर्द होने तथा चक्कर आने की शिकायत करती दिखीं।
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