जरूरतमंदों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए सर्वेक्षण करें: अदालत ने महाराष्ट्र सरकार से कहा
उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति माधव जामदार ने यह निर्देश मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता संजय धर्माधिकारी द्वारा दायर एक अर्जी पर सुनवायी करते हुए दिया।
नागपुर, 14 मई बम्बई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार से जरुरतमंद और गरीब व्यक्तियों, प्रवासियों और विस्थापित मजदूरों की पहचान करने के लिए एक सर्वेक्षण करने को कहा है ताकि उन्हें अनाज की मुफ्त किट मुहैया करायी जा सके।
उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति माधव जामदार ने यह निर्देश मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता संजय धर्माधिकारी द्वारा दायर एक अर्जी पर सुनवायी करते हुए दिया।
अर्जी में अदालत से नागपुर नगर निकाय को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि वह कोरोना वायरस के प्रसार पर रोक के लिए लागू लॉकडाउन के मद्देनजर सभी जरूरतमंदों, गरीबों, प्रवासियों और विस्थापित व्यक्तियों को मुफ्त में अनाज मुहैया कराये, यदि उनके पास राशन कार्ड नहीं है फिर भी।
अदालत ने उल्लेखित किया कि 29 मार्च 2020 के एक सरकारी प्रस्ताव के तहत राशन कार्ड नहीं होने के बावजूद सभी जरूरतमंदों, गरीबों, प्रवासियों और विस्थापित श्रमिकों को कुछ निश्चित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा।
न्यायमूर्ति जामदार ने कहा कि सरकार और स्थानीय निकाय जहां जरूरतमंद व्यक्तियों को राहत मुहैया कराने के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रही हैं, इस प्रस्ताव का व्यापक प्रचार प्रसार करने की जरूरत है। अदालत ने कहा, ‘‘तथ्यात्मक स्थिति से पता चलता है कि पिछले कुछ दिनों से लाखों प्रवासी परिवहन के किसी न किसी साधन से अपने मूल स्थानों की यात्रा कर रहे हैं और यदि यह उपलब्ध नहीं है तो 500, 1,000 या 2,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी पैदल तय कर रहे हैं जो स्पष्ट रूप से दिखाता है कि महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में जरूरतमंद व्यक्तियों को खाद्यान्न की आपूर्ति नहीं की गई है।
अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए उनके पास अपने मूल स्थान पर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।’’
अदालत ने सरकार को राज्य में तीन दिन के भीतर एक सर्वेक्षण करा कर ऐसे व्यक्तियों का पता लगाने का निर्देश दिया जिन्हें जीवित रहने के लिए खाद्यान्न की आपूर्ति की जानी है।
अदालत ने कहा,‘‘इस उद्देश्य के लिए यदि जरूरी हो तो सरकार उन कर्मचारियों को बुला सकती है जो लॉकडाउन के चलते ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं
अदालत ने कहा, ‘‘व्यक्तियों की पहचान होने के तुरंत बाद उन्हें जरूरी खाद्यान्न के खाद्य किट मुहैया कराये जाएं जिसमें गेहूं -10 किलोग्राम, चावल -10 किग्रा, तुअर दाल -1 किग्रा, चना दाल -1 किग्रा, चीनी -1 किग्रा, चाय 250ग्राम और खाद्य तेल-एक लीटर प्रदान किया जाएगा।’’
अदालत ने कहा कि प्राधिकारी उन लोगों का रिकार्ड रखेंगे जिन्हें यह किट मुहैया करायी जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जाए कि लोग जमाखोरी नहीं करें।
अदालत ने मामले की अगली सुनवायी दो सप्ताह बाद करना तय किया।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 14, 2020 04:01 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

