देश की खबरें | गौरी को शपथ लेने से रोकने संबंधी याचिका पर सुनवाई में आश्चर्यजनक फेरबदल

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. न्यायमूर्ति लक्ष्मण चंद्रा विक्टोरिया गौरी को मद्रास उच्च न्यायालय में बतौर न्यायाधीश शपथ लेने से रोकने संबंधी याचिकाओं पर मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में समय-दर-समय स्थिति में फेरबदल देखने को मिला। पहले अफवाह यह फैली कि उनके शपथ ग्रहण से महज एक घंटे पहले सुबह करीब सवा नौ बजे मामले की सुनवाई हो सकती है।

नयी दिल्ली, सात फरवरी न्यायमूर्ति लक्ष्मण चंद्रा विक्टोरिया गौरी को मद्रास उच्च न्यायालय में बतौर न्यायाधीश शपथ लेने से रोकने संबंधी याचिकाओं पर मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में समय-दर-समय स्थिति में फेरबदल देखने को मिला। पहले अफवाह यह फैली कि उनके शपथ ग्रहण से महज एक घंटे पहले सुबह करीब सवा नौ बजे मामले की सुनवाई हो सकती है।

जैसे ही यह पता चला कि उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीशों के रूप में गौरी और चार अन्य का शपथ ग्रहण सुबह 10.35 बजे निर्धारित है, शीर्ष अदालत में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने इस मामले को शपथ से पहले सूचीबद्ध कराने की कोशिश की, जबकि यह मामला न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की पीठ के समक्ष आज आइटम नंबर 38 के रूप में सूचीबद्ध था।

सुबह करीब 8.50 बजे अफवाहें फैलने लगीं कि इस मामले की सुनवाई भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ कर सकती है, जिसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन और आनंद ग्रोवर सहित याचिकाकर्ताओं के वकील सीजेआई के अदालत कक्ष में इंतजार करते देखे गए।

इसके तुरंत बाद, शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर वाद सूची से पता चला कि दो याचिकाएं न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बीआर गवई की विशेष पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सुबह 10.30 बजे आइटम नंबर 301 के रूप में सूचीबद्ध थीं।

सीजेआई के अदालत कक्ष में इंतजार कर रहे वकील तब अदालत संख्या-सात पहुंचे, जहां विशेष पीठ को सुनवाई शुरू करनी थी।

निर्धारित समय से पांच मिनट पहले लगभग 10.25 बजे न्यायमूर्ति खन्ना और न्यायमूर्ति अपनी सीट तक आए और सुनवाई शुरू हुई।

करीब 25 मिनट तक दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा, "हम रिट याचिका पर विचार नहीं कर रहे हैं। कारण बाद में दिये जाएंगे।’’

न्यायालय द्वारा गौरी की नियुक्ति के खिलाफ याचिकाओं को खारिज करने से चंद मिनट पहले, उन्हें मद्रास उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टी राजा ने लगभग 10:48 बजे एक अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पद की शपथ दिलाई।

शीर्ष अदालत दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें से एक मद्रास उच्च न्यायालय के तीन वकीलों द्वारा दायर की गई थी, जिसमें अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में गौरी की नियुक्ति का विरोध किया गया था।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को तीन वकीलों की याचिका को 10 फरवरी के लिए सूचीबद्ध किया था, लेकिन बाद में रामचंद्रन द्वारा मामले का विशेष उल्लेख किए जाने के बाद यह कहते हुए इसे सात फरवरी के लिए सूचीबद्ध कर दिया था कि केंद्र ने गौरी की नियुक्ति को अधिसूचित कर दिया है।

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