देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय ने सिविल सेवा परीक्षा मामले में केंद्र सरकार के हलफनामे पर नाराजगी जताई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार से यूपीएससी सिविल परीक्षा मामले में उसके द्वारा दाखिल एक हलफनामे को लेकर सवाल पूछा कि इसमें यह नहीं बताया गया है कि किस स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि यूपीएससी सिविल सेवा के उन अभ्यर्थियों को एक और अवसर प्रदान नहीं किया जाएगा जो कोविड-19 महामारी के कारण, अपने अंतिम प्रयास में 2020 की परीक्षा में नहीं दे सके थे।

नयी दिल्ली, 28 जनवरी उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार से यूपीएससी सिविल परीक्षा मामले में उसके द्वारा दाखिल एक हलफनामे को लेकर सवाल पूछा कि इसमें यह नहीं बताया गया है कि किस स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि यूपीएससी सिविल सेवा के उन अभ्यर्थियों को एक और अवसर प्रदान नहीं किया जाएगा जो कोविड-19 महामारी के कारण, अपने अंतिम प्रयास में 2020 की परीक्षा में नहीं दे सके थे।

न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस पर नाराजगी व्यक्त की और कहा कि उनके समक्ष दायर हलफनामे में यह स्पष्ट नहीं है कि यह निर्णय किस स्तर पर लिया गया है।

मामले की सुनवाई करने वाली पीठ में न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी भी शामिल हैं।

पीठ ने कहा कि यह सामान्य हलफनामा एक अवर सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा दायर किया गया है।

पीठ ने कहा, ‘‘यह एक नीतिगत निर्णय है।’’

उन्होंने कहा कि हलफनामे में इस बारे में कुछ नहीं बताया गया है कि यह निर्णय किस स्तर पर लिया गया है।

शीर्ष अदालत ने मामले की अगली की सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित की है।

न्यायालय उन अभ्यर्थियों को यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा के लिए एक और मौका देने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है जो 2020 में महामारी के कारण अपना अंतिम प्रयास नहीं कर पाए थे।

केंद्र सरकार ने 25 जनवरी को, उच्चतम न्यायालय को बताया था कि कोविड-19 के कारण 2020 में अंतिम प्रयास की परीक्षा में भाग नहीं ले पाने वाले छात्रों को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में अतिरिक्त मौका देने की अनुमति संपूर्ण परीक्षा प्रणाली को व्यापक रूप से प्रभावित करेगी।

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