देश की खबरें | जानवरों के ‘हलाल’ की प्रथा के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई से उच्चतम न्यायालय का इंकार
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने खाने के उद्देश्य से जानवरों को ‘हलाल’ करने की प्रथा को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई करने से इंकार कर दिया और कहा कि वह निर्णय नहीं कर सकता कि कौन ‘‘शाकाहारी हो सकता है या मांसाहारी हो सकता है।’’

न्यायमूर्ति एस. के. कौल और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने ‘अखंड भारत मोर्चा’ की तरफ से दायर जनहित याचिका को ‘‘शरारतपूर्ण’’ करार दिया, जिसमें जानवरों को ‘हलाल’ करने पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया गया था।

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पीठ ने कहा, ‘‘अदालत तय नहीं कर सकती कि कौन शाकाहारी हो सकता है या मांसाहारी हो सकता है। जो लोग हलाल मांस खाना चाहते हैं वे हलाल मांस खा सकते हैं। जो लोग ‘झटका’ मांस खाना चाहते हैं वे झटका मांस खा सकते हैं।’’

वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से मामले की सुनवाई करने वाली पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि कल एक और याचिका दायर की जा सकती है जिसमें कहा जाएगा कि किसी को मांस नहीं खाना चाहिए।

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याचिका में पशुओं के प्रति अत्याचार निवारण कानून 1960 के प्रावधानों का जिक्र किया गया था और अदालतत से आग्रह किया गया था कि जानवरों को काटने का ज्यादा दर्दनाक तरीका ‘हलाल’ रोका जाए।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, ‘‘हलाल की तकनीक विशिष्ट समुदाय (मुस्लिम) के निपुण लोग करते हैं। इसमें जानवर के शरीर से खून का अंतिम कतरा निकलने तक उसका जिंदा रहना जरूरी होता है...यह ‘झटका’ की तुलना में काफी दर्दनाक है। झटका में जानवर के रीढ़ पर प्रहार किया जाता है जिसमें उसकी तुरंत मौत हो जाती है।’’

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