देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय धनशोधन मामले में जारी समन के खिलाफ राणा अय्यूब की अर्जी पर सुनवाई को तैयार
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नयी दिल्ली, 17 जनवरी उच्चतम न्यायालय मंगलवार को पत्रकार राणा अय्यूब की उस अर्जी पर सुनवाई करने पर सहमत हो गया जिसमें उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज किए गए धनशोधन के मामले में गाजियाबाद की विशेष अदालत की ओर से जारी समन को चुनौती दी है।
अय्यूब की ओर से पेश अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अर्जी पर तत्काल सुनवाई किए जाने का अनुरोध किया। इस पर प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिंह की पीठ ने कहा कि वह 23 जनवरी को सुनवाई करेगी।
ग्रोवर ने कहा कि गाजियाबाद की विशेष अदालत ने समन जारी कर अय्यूब को 27 जनवरी को पेश होने को कहा है, इसलिए इस मामले पर तत्काल सुनवाई की जाए।
अय्यूब ने रिट याचिका में अनुरोध किया है कि गाजियाबाद में जारी ईडी प्रक्रिया को रद्द किया जाए क्योंकि कथित धनशोधन का अपराध मुंबई में हुआ और यह गाजियाबाद न्यायाधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल 29 नवंबर को गाजियाबाद की धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज की गई अभियोजन शिकायत का संज्ञान लेते हुए अय्यूब को समन जारी किया था।
अदालत ने रेखांकित किया कि अभियोजन की ओर से धनशोधन निवारण अधिनियम-2002 की धारा 45 जिसे धारा-44 के साथ पढ़ा जाए के तहत धनशोधन का मामला दिल्ली में ईडी के सहायक निदेशक संजीत कुमार साहू द्वारा दर्ज कराया गया।
विशेष अदालत के न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा, ‘‘मैंने उपरोक्त अभियोजन द्वारा उल्लेखित शिकायत का अवलोकन किया और बयान संबंधी दस्तावेज सहित अभियोजन के कागजातों को देखा। पूरे रिकॉर्ड को देखने पर प्रथम दृष्टया अपराध के सिलसिले में राणा अय्यूब के खिलाफ संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।’’
उल्लेखनीय है कि पिछले साल 12 अक्टूबर को अय्यूब के खिलाफ दाखिल आरोपपत्र में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने जनता को धोखा दिया और परमार्थ के लिए जुटाई गई 2.69 करोड़ रुपये की राशि से निजी संपत्ति बनाई तथा विदेशी चंदा अधिनिमय का भी उल्लंघन किया।
ईडी ने बयान में कहा, ‘‘राणा अय्यूब ने ‘किटो मंच’ पर परमार्थ कार्य हेतु धन जुटाने के लिए अप्रैल 2020 से लेकर अब तक तीन अभियान चलाए और कुल 2,69,44,680 रुपये एकत्र किए।’’
एजेंसी ने बताया कि जांच में खुलासा हुआ कि ऑनलाइन मंच से एकत्र धन को अय्यूब के पिता और बहन के खाते में मंगाया गया और इसके बाद अय्यूब ने राशि अपने व्यक्तिगत खाते में हस्तांतरित कर ली।
ईडी ने दावा किया, ‘‘अय्यूब ने अभियान से एकत्र राशि में से 50 लाख रुपये की राशि अपने नाम पर सावधि जमा खाते में डाल दी और अन्य 50 लाख रुपये नए खाते में हस्तांतरित कर दिए। जांच में पता चला कि केवल 29 लाख रुपये का इस्तेमाल राहत कार्य में किया गया।’’
एजेंसी ने कहा, ‘‘राहत कार्य में अधिक खर्च दिखाने के लिए अय्यूब द्वारा फर्जी बिल जमा किए गए और इसलिए चार फरवरी 2022 के कुर्की आदेश के तहत अय्यूब के खाते में जमा 1,77,27,704 रुपये (जिनमें 50 लाख रुपये की सावधि जमा शामिल है) की राशि को पीएमएलए के तहत कुर्क कर लिया गया।’’
ईडी ने धनशोधन मामले की जांच सात सितंबर 2021 को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित इंदिरापुरम थाने में अय्यूब के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2008 और काला धन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी।
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