देश की खबरें | असम में पुलिस मुठभेड़ों के खिलाफ जनहित याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने जारी किया नोटिस

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने गौहाटी उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सोमवार को असम सरकार और अन्य से जवाब मांगा। उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री हिमंत ‍विश्व शर्मा के मई 2021 में शासन की बागडोर संभालने के बाद से हुई सिलसिलेवार पुलिस मुठभेड़ों पर एक जनहित याचिका खारिज कर दी थी।

नयी दिल्ली, 17 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने गौहाटी उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सोमवार को असम सरकार और अन्य से जवाब मांगा। उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री हिमंत ‍विश्व शर्मा के मई 2021 में शासन की बागडोर संभालने के बाद से हुई सिलसिलेवार पुलिस मुठभेड़ों पर एक जनहित याचिका खारिज कर दी थी।

न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने वकील आरिफ मोहम्मद यासीन जवादर द्वारा दायर अपील पर राज्य सरकार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अन्य को नोटिस जारी किए।

गौहाटी उच्च न्यायालय ने 27 जनवरी को जनहित याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि किसी अलग जांच की आवश्यकता नहीं है क्योंकि राज्य सरकार पहले से ही प्रत्येक मामले में अलग जांच कर रही है।

मामले में एक सरकारी हलफनामे का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि मई 2021 और अगस्त 2022 के बीच 171 घटनाओं में 56 लोग मारे गए, जिनमें से चार व्यक्ति हिरासत में मारे गए। इसके अलावा 145 अन्य घायल हुए।

जवादर ने जनहित याचिका में दावा किया कि मई 2021 में हिमंत विश्व शर्मा ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से असम पुलिस और विभिन्न मामलों के आरोपियों के बीच 80 से अधिक “फर्जी मुठभेड़” हुई हैं। इसके परिणामस्वरूप 28 लोगों की मौत हो गई और 48 से अधिक घायल हो गए।

जनहित याचिका में कहा गया है कि मारे गए या घायल हुए लोग खूंखार अपराधी नहीं थे और सभी मुठभेड़ों में पुलिस की कार्यप्रणाली एक जैसी रही है।

जवादर ने अदालत की निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी, विशेष जांच दल (एसआईटी) या अन्य राज्यों की पुलिस टीम से जांच कराए जाने की मांग की।

याचिका में कहा गया है कि अखबारों में प्रकाशित पुलिस के बयानों के अनुसार, हर मामले में आरोपियों ने पुलिस कर्मियों के सरकारी हथियार छीनने की कोशिश की और आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप कथित अपराधी की मौत हो गई, या वह घायल हो गया।

मामले में असम सरकार के अलावा, असम पुलिस महानिदेशक, राज्य के कानून और न्याय विभाग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और असम मानवाधिकार आयोग को प्रतिवादी बनाया गया है।

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