देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय ने सेशेल्सवासी के राजनयिक छूट का दावा किया खारिज
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नयी दिल्ली, सात दिसंबर उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि यहां दर्ज आपराधिक मामलों में जांच का सामना कर रहा सेशेल्स का एक कारोबारी भारत में ‘राजनयिक छूट’ का दावा करने का हकदार नहीं है।
शीर्ष न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता सी शिवशंकरन ने मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष राजनयिक छूट का मुद्दा उठाया था, जिसने 2019 में उनकी अलग याचिका खारिज कर दी थी और उस आदेश को याचिकाकर्ता द्वारा चुनौती नहीं दी गई है।
न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति सी. टी. रविकुमार की पीठ ने कहा कि सीबीआई ने विदेश मंत्रालय की ओर से किया गया पत्राचार पेश किया है, जो सेशेल्स सरकार द्वारा भेजे गये दूसरे पत्राचार को संदर्भित करता है, जिसमें बताया गया है कि याचिकाकर्ता उस देश का राजदूत है और उसे एक राजनयिक पासपोर्ट जारी किया गया था, लेकिन भारत में उनकी उपस्थिति उस सरकार की ओर से आधिकारिक तैनाती नहीं थी।
अदालत ने कहा कि पत्राचार में बताई गई स्थिति की सत्यता पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है और शीर्ष न्यायालय में दाखिल हलफनामे में भी इसे दोहराया गया है।
पीठ ने कहा, "वास्तव में, मद्रास उच्च न्यायालय के निर्णय को चुनौती नहीं दी गयी है और हम मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा याचिकाकर्ता की स्थिति के संबंध में व्यक्त किए गए दृष्टिकोण से सहमत हैं।’’
न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता की राजनयिक छूट के दावे को नहीं सुना जा सकता और इस प्रकार संबंधित आपराधिक कार्रवाई को रद्द करने के लिए रिट याचिका में दावा की गई राहत को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पीठ ने याचिकाकर्ता की याचिका में उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति संलग्न नहीं करने को लेकर भी गम्भीर चिंता व्यक्त की।
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