देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय ने 2018 के आधार फैसले की समीक्षा के अनुरोध वाली याचिकाओं को खारिज किया

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नयी दिल्ली, 20 जनवरी उच्चतम न्यायालय ने 2018 में केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी आधार योजना को लेकर दिये अपने फैसले की समीक्षा के अनुरोध वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

उच्चतम न्यायालय ने 2018 में आधार योजना को संतुलित बताते हुये इसकी संवैधानिक वैधता बरकरार रखी थी लेकिन न्यायालय ने बैंक खातों, मोबाइल कनेक्शन और स्कूल में बच्चों के प्रवेश आदि के लिये इसकी अनिवार्यता संबंधी प्रावधान निरस्त कर दिये थे।

न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय एक संविधान पीठ ने 26 सितम्बर, 2018 के उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिकाओं को 4:1 के बहुमत के साथ खारिज कर दिया।

पीठ के पांच न्यायाधीशों में से एक न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने बहुमत वाले इस फैसले से असहमति जताई और कहा कि समीक्षा याचिकाओं को तब तक लंबित रखा जाना चाहिए जब तक कि एक वृहद पीठ विधेयक को एक धन विधेयक के रूप प्रमाणित करने पर फैसला नहीं कर लेती।

आधार विधेयक को धन विधेयक के रूप में प्रमाणित किया गया था जिससे सरकार राज्यसभा में बहुमत की स्वीकृति प्राप्त किए बिना इस पारित कराने में समक्ष हो गई थी।

गत 11 जनवरी के बहुमत वाले आदेश में कहा गया है, ‘‘वर्तमान समीक्षा याचिकाओं को 26 सितम्बर, 2018 के अंतिम फैसले और आदेश के खिलाफ दाखिल किया गया था। हमने समीक्षा याचिकाओं का अवलोकन किया है। हमारी राय में 26 सितम्बर, 2018 की तिथि में दिये गये फैसले और आदेश की समीक्षा का कोई मतलब नहीं है।’’

पीठ में न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति ए अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति बी आर गवई शामिल थे।

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