जरुरी जानकारी | चीनी उत्पादन फरवरी तक 20 प्रतिशत बढ़कर 233.77 लाख टन
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. देश में चीनी उत्पादन चाल अक्टूबर-सितंबर 2020-21 वर्ष के पहले पांच महीनों में 20 प्रतिशत बढ़कर 233.77 लाख टन हो गया। गन्ने की पैदावार ऊंची होने से चीनी उत्पादन में बढ़ोतरी संभव हुई है।
नयी दिल्ली, तीन मार्च देश में चीनी उत्पादन चाल अक्टूबर-सितंबर 2020-21 वर्ष के पहले पांच महीनों में 20 प्रतिशत बढ़कर 233.77 लाख टन हो गया। गन्ने की पैदावार ऊंची होने से चीनी उत्पादन में बढ़ोतरी संभव हुई है।
चीनी मिलों के संगठन इस्मा ने बुधवार को मांग की कि मिलों की नकदी की स्थिति में सुधार लाने के लिए चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाया जाए।
भारतीय चीनी-मिल संघ (इस्मा) ने कहा कि गन्ना किसानों को गन्ने का बकाया चुकाने में मिलों की मदद करने के लिए चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) को मौजूदा 31 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 34.5 रुपये प्रति किलोग्राम किया जाना चाहिए।
पिछले वर्ष की इसी अवधि में 194.82 लाख टन के चीनी उत्पादन की तुलना में, वर्ष 2020-21 में फरवरी तक 233.77 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। चीनी विपणन वर्ष अक्टूबर से सितंबर तक चलता है।
अक्टूबर-फरवरी 2020-21 की अवधि के दौरान, महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन एक वर्ष पूर्व की समान अवधि के 50.70 लाख टन की तुलना में बढ़कर इस बार 84.85 लाख टन हो गया। उत्तर प्रदेश में उत्पादन 76.86 लाख टन की जगह 74.20 लाख टन रहा।
कर्नाटक में फरवरी तक चीनी उत्पादन पिछले साल इसी अवधि के 32.60 लाख टन की तुलना में बढ़कर 40.53 लाख टन रहा।
पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले चीनी की मौजूदा कीमतें लगभग 80-100 रुपये प्रति क्विंटल कम हैं।
इस्मा ने कहा, "चीनी की कम कीमत कोई अच्छा संकेत नहीं है, जो कीमत पिछले कई महीनों से उत्पादन लागत से बहुत कम है और जिसने चीनी मिलों की नकदी की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है और गन्ना किसानों को एफआरपी (उचित एवं लाभकारी मूल्य) का भुगतान करने की उनकी क्षमता को प्रभावित किया है।" इस्मा ने आशंका जताई कि अगर ऐसी स्थिति बनी रहती है तो गन्ने की बकाया राशि, बहुत तेजी से असुविधाजनक स्तर तक पहुंच जाएगी।
इस्मा ने चीनी एमएसपी को बढ़ाने की सिफारिश की, जिसे दो साल पहले बढ़ाया गया था जब गन्ने का एचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 275 रुपये प्रति क्विंटल था।
निर्यात के संदर्भ में, इस्मा ने कहा कि चीनी मिलों को ट्रकों और कंटेनरों की कमी के साथ-साथ बंदरगाहों पर जहाजों की की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिनके बारे में सरकार और संबंधित अधिकारियों के समक्ष मुद्दा उठाया गया है।
उन्होंने कहा, "हम इन समस्याओं के जल्द समाधान की उम्मीद करते हैं, क्योंकि फरवरी 2021 के अंत तक लगभग 32 लाख टन निर्यात अनुबंध किये गये है।"
केंद्र चीनी निर्यात करने के लिए चीनी मिलों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है।
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(The above story first appeared on LatestLY on Mar 03, 2021 09:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

