विदेश की खबरें | सूडान के शीर्ष जनरल दक्षिण सूडान के राष्ट्रपति से वार्ता के लिए जुबा पहुंचे

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. सत्तारूढ़ संप्रभु परिषद के अध्यक्ष जनरल अब्देल-फतह बुरहान दक्षिण सूडान की राजधानी जुबा में हवाई अड्डे पर उतरे तो खुद दक्षिण सूडान के राष्ट्रपति साल्वा कीर ने उनका स्वागत किया। दक्षिण सूडान वर्ष 2011 में लंबे संघर्ष के बाद आजाद हुआ था। सूडान में जारी लड़ाई के मद्देनजर पहले भी दक्षिण सूडान के राष्ट्रपति ने युद्धरत जनरलों के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश की थी।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

सत्तारूढ़ संप्रभु परिषद के अध्यक्ष जनरल अब्देल-फतह बुरहान दक्षिण सूडान की राजधानी जुबा में हवाई अड्डे पर उतरे तो खुद दक्षिण सूडान के राष्ट्रपति साल्वा कीर ने उनका स्वागत किया। दक्षिण सूडान वर्ष 2011 में लंबे संघर्ष के बाद आजाद हुआ था। सूडान में जारी लड़ाई के मद्देनजर पहले भी दक्षिण सूडान के राष्ट्रपति ने युद्धरत जनरलों के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश की थी।

परिषद के अनुसार, दोनों नेताओं ने सलामी गारद का निरीक्षण किया और फिर वार्ता के लिए रवाना हुए जो सूडान में संघर्ष पर केंद्रित होगी।

सूडान में अप्रैल में बुरहान के नेतृत्व वाली सेना और मोहम्मद हमदान दागालो के नेतृत्व वाले शक्तिशाली अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के बीच बढ़ते तनाव से राजधानी और अन्य जगहों पर लड़ाई शुरू हो गई।

इस लड़ाई से राजधानी खार्तूम एक शहरी युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गयी, लेकिन अभी कोई भी पक्ष शहर पर नियंत्रण हासिल करने में कामयाब नहीं हो पाया है।

अधिकार समूहों और संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, संघर्ष जातीय हिंसा में बदल गया है। ऐसे में पश्चिमी दारफुर क्षेत्र में 2000 के दशक की शुरुआत में एक नरसंहार अभियान के दृश्य याद आ रहे हैं।

फिलहाल आरएसएफ और सहयोगी अरब मिलीशिया जातीय अफ्रीकी समूहों पर हमला कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, अनुमान है कि संघर्ष में कम से कम 4,000 लोग मारे गए हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर कार्यरत कार्यकर्ताओं और चिकित्सकों का कहना है कि मरने वालों की संख्या कहीं अधिक होने की आशंका है।

संयुक्त राष्ट्र प्रवासन एजेंसी के मुताबिक, अब तक 48 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं जिनमें देश में ही अन्य जगहों पर गए 38 लाख से अधिक लोग और पड़ोसी देशों में शरण लेने वाले 10 लाख से अधिक लोग शामिल हैं।

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