ताजा खबरें | एक साथ चुनाव कराने का विषय विधि आयोग के समक्ष: सरकार
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नयी दिल्ली, 22 जुलाई सरकार ने शुक्रवार को कहा कि देश में लोकसभा चुनाव और सभी विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का विषय विधि आयोग के समक्ष है ताकि एक व्यावहारिक रूपरेखा तैयार की जा सके।
विधि मंत्री किरेन रीजीजू ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में संसद की एक समिति का भी उल्लेख किया जिसने कहा था कि बार-बार चुनाव होने से सामान्य जनजीवन अवरुद्ध होता है और रोजमर्रा की सेवाओं पर प्रभाव पड़ता है, वहीं एक साथ चुनाव कराने से हर साल अलग चुनाव कराने पर होने वाले भारी-भरकम खर्च को कम किया जा सकेगा।
रीजीजू ने कहा कि 2014-15 में अनेक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को चुनावों के लिए 510 करोड़ रुपये की राशि जारी की गयी थी। इसी तरह 2015-16 में चुनावों पर 1,490.16 करोड़ रुपये जारी किये गये, 2016-17 में 356.14 करोड़ रुपये, 2017-18 में 1,199.85 करोड़ रुपये, 2018-19 में 886.11 करोड़ रुपये और 2019-20 में इस उद्देश्य से 1,372.03 करोड़ रुपये जारी किये गये।
मंत्री ने कहा कि 2014 से 2022 तक राज्य विधानसभाओं के 50 चुनाव हुए। दिशानिर्देशों के अनुसार लोकसभा चुनाव का पूरा खर्च केंद्र द्वारा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव कराने का सारा खर्च संबंधित राज्य सरकारें वहन करती हैं।
चुनाव एक साथ कराने की स्थिति में खर्च को संबंधित राज्यों और केंद्र द्वारा 50:50 के आधार पर वहन किया जाएगा।
रीजीजू ने कहा कि संसद की एक समिति ने एक साथ चुनाव कराने के विषय पर निर्वाचन आयोग समेत विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘समिति ने इस संबंध में कुछ सिफारिश दी हैं। मामला अब विधि आयोग को भेजा गया है ताकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के लिए व्यावहारिक रूपरेखा पर काम करने के लिए और अध्ययन किया जा सके।’’
21वें विधि आयोग ने अपनी मसौदा रिपोर्ट में कहा था कि वह इस बात से संतुष्ट है कि ‘‘लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की जरूरत को देखते हुए एक व्यवहार्य माहौल है। एक साथ चुनाव को देश को सतत रूप से चुनाव के मोड से निकालने के समाधान के रूप में देखा जा सकता है।’’
22वें विधि आयोग का गठन फरवरी, 2020 में किया गया था, लेकिन इसमें कोई अध्यक्ष और सदस्य नहीं है तथा इसका तीन साल का कार्यकाल समाप्त होने वाला है।
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