देश की खबरें | दिल्ली के पीएम2.5 प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी बृहस्पतिवार को छह प्रतिशत थी: सफर

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केन्द्र सरकार की एक एजेंसी के अनुसार दिल्ली के पीएम 2.5 में पराली जलाने की हिस्सेदारी बृहस्पतिवार को छह प्रतिशत थी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर केन्द्र सरकार की एक एजेंसी के अनुसार दिल्ली के पीएम 2.5 में पराली जलाने की हिस्सेदारी बृहस्पतिवार को छह प्रतिशत थी।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली ‘सफर’ के अनुसार यह बुधवार को केवल एक प्रतिशत और मंगलवार, सोमवार और रविवार को लगभग तीन प्रतिशत थी।

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पीएम2.5 से मतलब व्यास में 2.5 माइक्रोन से कम सूक्ष्म कण से है जो फेफड़ों में गहराई से प्रवेश कर सकता है।

इसके अनुसार, ‘‘दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बहुत ही खराब श्रेणी में दर्ज किया गया और इसके शुक्रवार को भी बहुत खराब श्रेणी में बने रहने का अनुमान है।’’

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सफर के आंकड़े के अनुसार दिल्ली के पीएम 2.5 में पराली जलाने की हिस्सेदारी बृहस्पतिवार को लगभग छह प्रतिशत थी।

इसके अनुसार हरियाणा, पंजाब और पड़ोसी सीमा क्षेत्रों में बुधवार को पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि देखी गई। पराली जलाने की घटनाएं 740 थी।

सफर के अनुसार पराली के धुएं को फैलाने के लिए हवा की दिशा आंशिक रूप से अनुकूल है और ‘‘इसलिए दिल्ली में पीएम 2.5 में इसकी हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है।’’

नासा के कृत्रिम उपग्रह द्वारा ली गई तस्वीर में पंजाब के अमृतसर, पटियाला, तरनतारन और फिरोजपुर तथा हरियाणा के अंबाला और राजपुरा में बड़े पैमाने पर खेतों में पराली जलाए जाने का पता चला है।

इससे पूर्व दिन में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि पराली जलाये जाने से दिल्ली-एनसीआर में सिर्फ चार प्रतिशत ही प्रदूषण होता है और शेष 96 प्रतिशत के लिये स्थानीय कारण जिम्मेदार हैं।

जावड़ेकर के इस बयान पर दिल्ली सरकार से तीव्र प्रतिक्रिया सामने आई।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘‘इनकार करते रहने से कोई फायदा नहीं होगा। यदि पराली जलाने की वजह से केवल चार प्रतिशत प्रदूषण होता है, तो पिछले पखवाड़े में अचानक प्रदूषण क्यों बढ़ गया है? हवा इससे पहले साफ थी। हर साल एक ही कहानी।''

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों में किसी अन्य स्थानीय स्रोत से प्रदूषण नहीं बढ़ा है, जो हाल में बढ़े प्रदूषण का कारण हो।’’

इसके बाद केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि जावड़ेकर केवल इस वर्ष पराली जलाने के संबंध में बात कर रहे थे, जिसकी हिस्सेदारी अब तक चार प्रतिशत है। पिछले साल, यह बहुत अधिक थी।

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