चेन्नई, 27 नवंबर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने सोमवार को चेन्नई में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री वी. पी. सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया और कहा कि ‘सामाजिक न्याय के संरक्षक’ को सम्मान देना सत्तारूढ़ द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (द्रमुक) का कर्तव्य है।
स्टालिन ने केंद्र से ‘विलंबित’ राष्ट्रीय जनगणना के साथ ही जाति गणना भी कराने की मांग की ताकि आबादी के अनुपात के आधार पर पात्र समुदायों के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश सिंह का मातृ राज्य था तो तमिलनाडु उनका ‘पितृ राज्य’ था।
स्टालिन ने शहर के प्रेसीडेंसी कॉलेज परिसर में स्थापित की गई पूर्व प्रधानमंत्री की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने इस साल अप्रैल में तमिलनाडु विधानसभा में इस बाबत घोषणा की थी।
स्टालिन ने समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर सिंह के परिजन भी मौजूद रहे।
अनावरण के बाद स्टालिन, यादव और अन्य लोगों ने सिंह की प्रतिमा पर पुष्पाजंलि अर्पित की।
बाद में, इस मौके पर एक जन सभा को संबोधित करते हुए, सत्तारूढ़ द्रमुक के अध्यक्ष स्टालिन ने कहा कि वह कॉलेज परिसर में सामाजिक न्याय के संरक्षक की प्रतिमा स्थापित करना अपना कर्तव्य मानते हैं ताकि सिंह के जीवन और उपलब्धियों से सब लोग सीख सकें।
उन्होंने कहा, “ उनका इतिहास विद्यार्थियों को बताया जाना चाहिए। इसलिए हमने एक कॉलेज में उनकी प्रतिमा लगवाई है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रतिमा मरीना तट पर द्रमुक के दिवंगत अध्यक्ष एम करुणानिधि के स्मारक के पास स्थित है।
स्टालिन ने कहा कि वह सिंह से केवल दो बार मिले थे और पूर्व प्रधानमंत्री ने 1988 में चेन्नई में उनके द्वारा निकाले गए विशाल जुलूस के लिए उनकी सराहना की थी।
उन्होंने समारोह में भाग लेने के लिए सिंह के परिवार, उनकी पत्नी सीता कुमारी, बेटे अजय सिंह और अन्य लोगों की सराहना की।
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