तिरुवल्लूर, 18 अप्रैल तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा की गयी उस आलोचना को लेकर शुक्रवार को उन्हें निशाना बनाया, जिसमें कहा गया है कि राज्य की सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार ‘भटकाने वाली’ रणनीति के तौर पर नीट और परिसीमन जैसे मुद्दों का राग अलाप रही है।
स्टालिन ने शाह को चुनौती दी कि वह राज्य की जनता के समक्ष साबित कर दें कि क्या वाकई राज्य सरकार लोगों का ध्यान भटका रही है।
उन्होंने यह भी कहा, ‘‘क्या आपको लगता है कि आप यहां कुछ लोगों को डराकर और गठबंधन बनाकर जीत सकते हैं? अपने सभी सहयोगियों को साथ लेकर आइए, हम लड़ाई के लिए तैयार हैं...न तो अमित शाह, न कोई दूसरा ‘शाह’...यहां शासन कर सकता है। यह तमिलनाडु है। जब तक मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन यहां है, आपकी योजनाएं सफल नहीं होंगी।’’
स्टालिन ने पोन्नेरी में एक सरकारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महिलाओं के लिए 1,000 रुपये मासिक सहायता सहित राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की एक शृंखला का विवरण दिया।
उन्होंने कुछ दिन पहले राज्य विधानसभा में दिव्यांग व्यक्तियों को सभी स्थानीय निकायों में सदस्य के रूप में नामित करने के लिए उनके द्वारा पेश किए गए दो विधेयकों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि जल्द ही तमिलनाडु के नगर निकायों में 15,000 से अधिक दिव्यांग व्यक्तियों की आवाज़ें गूंजेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी कई पहलों को देखते हुए, द्रमुक शासन के तहत आत्मविश्वास बढ़ा है और राज्य का भी विकास हुआ है।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें सरकार में कोई दोष नहीं मिला और इसलिए वे बदनाम करने वाले आरोप लगा रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि चाहे कानून-व्यवस्था हो, शासन हो या कोई अन्य सूचकांक, राज्य शीर्ष प्रदर्शन कर रहा है। हालांकि, कुछ विपक्षी दलों ने जिम्मेदार विपक्ष के रूप में काम करने के बजाय तमिलनाडु राज्य के विरोधी दलों की तरह व्यवहार किया।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न सरकारी परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास के मौके पर आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि तमिलनाडु एवं द्रमुक, नीट समेत अन्य मुद्दों का पुरजोर विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘चाहे वह नीट हो या त्रि- नीति, वक्फ संशोधन अधिनियम या परिसीमन- जिससे कुछ राज्यों के प्रभावित होने की संभावना है- केवल हम ही पुरजोर विरोध कर रहे हैं। अमित शाह ने कहा था कि हम ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कह रहे हैं। मैं जो कहना चाहता हूं वह यह है कि तमिलनाडु सभी भारतीय राज्यों के लिए संघर्ष कर रहा है। क्या राज्यों के अधिकारों की मांग करना गलत है।’’
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