विदेश की खबरें | श्रीलंका कठोर आतंकवाद निरोधक कानून की जगह नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लाएगा
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

कोलंबो, 23 अगस्त श्रीलंका ने मंगलवार को ऐलान किया कि वह जल्द ही अपने विवादित आतंकवाद निरोधक कानून (पीटीए) की जगह नया राष्ट्रीय सुरक्षा काननू लाएगा। छात्र कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के लिए कठोर पीटीए कानून का इस्तेमाल करने को लेकर कोलंबो की अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच सरकार ने यह ऐलान किया।

कैबिनेट प्रवक्ता और मंत्री बंडुला गुणवर्धना ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पीटीए वर्ष 1979 से है। न्याय मंत्री ने कैबिनेट को सूचित किया कि पीटीए के अवांछित हिस्सों को हटाकर एक नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून बनाया जाएगा।’’

अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा सोमवार को विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए तीन छात्र कार्यकर्ताओं को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत हिरासत में लेने की घटना पर चिंता व्यक्त करने के एक दिन बाद यह कदम उठाया गया। विरोध-प्रदर्शन के कारण पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को इस्तीफा देना पड़ा था।

श्रीलंका में अमेरिकी राजदूत जूली चुंग ने ट्वीट किया, ‘‘पीटीए जैसे कानूनों का उपयोग करना जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप नहीं हैं, श्रीलंका में लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाता है। हम सरकार को लोगों के विचारों को व्यक्त करने के अधिकारों को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।’’

यूरोपीय संघ ने भी इस पर चिंता व्यक्त की है। यूरोपीय संघ के एक बयान में कहा गया कि हालिया गिरफ्तारी में पीटीए के इस्तेमाल संबंधित रिपोर्ट को लेकर वह चिंतित है।

मानवाधिकार रक्षकों पर अमेरिका की विशेष दूत मैरी लॉलर ने भी छात्रों को हिरासत में लेने के लिए पीटीए के इस्तेमाल पर चिंता व्यक्त की है।

इंटर-यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स फेडरेशन (आईयूएसएफ) के तीन छात्रों - मुदालिगे वासंथ कुमारा, हसन जीवंथा और बौद्ध भिक्षु गालवेवा सिरिधम्मा को 18 अगस्त को हिरासत में लिया गया।

श्रीलंका के विधिज्ञ संघ (बार एसोसिएशन) ने राष्ट्रपति और कानून प्रवर्तन अधिकारियों को पीटीए का उपयोग करने से परहेज करने समेत हिरासत में लेने के आदेश को तुरंत रद्द करने के लिए कहा है।

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